बाहरी दिल्ली के पूठ कलां में अवैध प्लास्टिक फैक्ट्रियों के प्रदूषण से आम निवासियों का जीना दूभर

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एस जेड मलिक-बाहरी दिल्ली के नॉर्थ वेस्ट ज़िला का पूठकलां विस्तार जहां दिल्ली सरकार मास्टर पालन के तहत ग्राम सभा के लिये छोड़ी गई भूमि जिस पर आज गांव के कुछ दबंगो का कब्ज़ा है । वहां गाँव के कुछ पूंजीपति ज़मींदार किस्म के लोगों ने उक्त भूमि को एसडीएम एवं अन्य स्थानीय अधिकारियों के साथ सांठ गांठ कर 300 गज़, से लेकर 800, और 1000 गज़ तक का प्लॉट घेर कर उस पर बाउंड्री वाल दे कर छाते ढाल कर प्लास्टिक के अवैध फैक्ट्रीयां किराए पर लगा कर 40,से 60 हज़ार रुपये महीने का उठा रहे है और प्लास्टिक की अवैध फैक्ट्री स्थानीय प्रसाशनिक अधिकारियो की निगरानी में चलाई जा रही है जब आये दिन किसी न किसी प्लास्टिक की इन फैक्ट्री में आगलगी जैसी घटनाएं होती रहती है मज़दूर हादसे के शिकार भी होते रहते हैं लेकिन स्थानीय प्रसाशन और फैक्ट्री के मालिकों की मिली भगत से मामले को रफा दफा का दिया जाता है- वहीं सुल्तानपुरी डबास के कांग्रेस पूर्व विधायक जय किशन का आरडी पब्लिक स्कूल से लेकर लखीराम चौक से आगे 5 नम्बर ट्रंफ़र्मर तक अवैध अवैध ही अवैध मकान जिसमे अवैध फैक्ट्रियां लगी है, बड़े ही शांतिपूर्ण तरीके से चलाई जा रही है जहां प्लास्टिक वेस्टेज और पोलोथिन को गलाने से उठने वाले प्रदूषण से वहां आस पास रहने वाले आम निवासियों का जीना दूभर होता है, वही जल बोर्ड द्वारा सप्लाई स्वक्ष जल भी पूठ में आते ही इतना बदबूदार और प्रदूषित हो जाता है कि इसका सेवन विषमय दूभर हो जाता है । परंतु क्या करें , जहां प्रशासन ही अवैध कारोबार को बढ़ावा दे और अपराध को संरक्षण दे तो उसे कौन रोक सकता है।

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