प्रेस दिवस पर आलेख

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आज अंतरराष्ट्रीय प्रेस दिवस है। एक सोशल एक्टिविस्ट और फ्रीलांस जर्नलिस्ट के रूप में झारखंड, विशेषकर संताल परगना के जनमुद्दों पर शिद्दत से काम करते हुए मुझे लगभग 25 वर्ष हो गए। इन 25 वर्षों में झारखंड के जनमुद्दों पर शोध पत्रकारिता करते हुए जिंदगी में कई उतार चढ़ाव हमने झेले। कहीं मान सम्मान तो कहीं अपमान मिला। बाबजूद एक जिद्द, एक जुनून, एक सामाजिक सरोकार और एक जनपक्षधरता ने न ही कभी मुझे टूटने दिया और न ही कभी किसी के सामने झूकने दिया। दुख और अभावों का जीवन जीते, वक्त और हालात से लड़ते रहे लेकिन अभाव में भी अपने स्वभाव को नष्ट नहीं होने दिया। एक लेखक और स्वतंत्र पत्रकार के नाते जहां एक ओर जनमुद्दों पर फिल्ड वर्क करते निरंतर लिखना जारी रहा, वहीं एक सोशल एक्टिविस्ट के नाते उन मुद्दों को लेकर विभिन्न मोर्चों पर लड़ते भिड़ते उसकी एडवोकेसी भी करता रहा, जिसमें आदिवासी समाज, उनका जीवन, उनकी संस्कृति, उनके संघर्ष व उनके मुद्दे हमेशा हमारी प्राथमिकता में रहे। इन 25 वर्षों में देश के विभिन्न छोटे बड़े क्षेत्रीय व राष्ट्रीय अखबारों और प्रतिष्ठित पत्र पत्रिकाओं में निरंतर प्रमुखता से हमारे शोध आलेख, फीचर्स और रिपोर्ट प्रकाशित होते रहे। चाहे प्रारंभिक दौर में दुमका दर्पण जैसे छोटे साप्ताहिक अखबार हों या फिर इंडियन पंच, बिहार ऑब्जर्वर, बासुकि मेल, संताल एक्सप्रेस और रांची एक्सप्रेस जैसे क्षेत्रीय अखबारों से लेकर प्रभात खबर, हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर, राष्ट्रीय सहारा, अमर उजाला, देशबंधु से लेकर द हिंदू जैसे बड़े राष्ट्रीय समाचार पत्रों और योजना व कुरुक्षेत्र जैसी देश की प्रतिष्ठित पत्रिकाओं तक पहुंचने और उसमें प्रमुखता से प्रकाशित होने की बात। एक लंबी संघर्ष यात्रा और उससे जुड़े ढ़ेर सारे खट्टे मीठे अनुभव। ढ़ेर सारे उतार चढ़ाव और मुट्ठी भर उपलब्धियां। जिसमें एक ओर राष्ट्रीय स्तर पर वर्ष 2009 में एन एफ आई दिल्ली से एक लाख रुपए का नेशनल मीडिया फेलोशिप अवार्ड, वहीं दूसरी ओर राज्य स्तर पर वर्ष 2013 में पचास हजार रुपए का झारखंड मीडिया फेलोशिप अवार्ड भी शामिल है। ये थोड़ी बहुत उपलब्धियां और उन्हीं थोड़ी बहुत मुट्ठी भर उपलब्धियों में कुछ वर्ष पहले की एक छोटी सी उपलब्धि जो आज के दिन अंतरराष्ट्रीय प्रेस दिवस से जुड़ी है आप मित्रों को साझा करते हुए हार्दिक खुशी हो रही है। यह तस्वीर और प्रेस कटिंग वर्ष 2013 की है। अवसर है झारखंड सरकार के पीआरडी डिपार्टमेंट द्वारा रांची में आयोजित अंतरराष्ट्रीय प्रेस दिवस पर झारखंड मीडिया फेलोशिप अवार्ड के तहत झारखंड के पत्रकारों के सम्मान समारोह का है। जिसमें दुमका के चार पत्रकार झारखंड मीडिया फेलोशिप अवार्ड से सम्मानित किए गए थे जिसमें एक मुझे भी शामिल होने का अवसर मिला था। सम्मानित होने वाले उन पत्रकार साथियों में प्रभात खबर से बड़े भाई आर के नीरद, वरिष्ठ पत्रकार मित्र इंडियन पंच के राजकुमार उपाध्याय और दैनिक जागरण के मेरे अत्यंत प्रिय मित्र राजीव रंजन और मैं अशोक सिंह स्वतंत्र पत्रकार। सुखद संयोग कि उस वक्त भी झारखंड के मुख्यमंत्री माननीय हेमंत सोरेन जी थे और आज जब इतने वर्षों बाद यह तस्वीर और उससे जुड़े अनुभव आपसे साझा कर रहा हूं तो इस वक्त भी वे हमारे झारखंड के मुख्यमंत्री हैं।

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