नई दिल्ली -छात्र हितों के लिए काम करने वाले देश के सबसे बड़े छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं ने छात्र हितों को लेकर दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन खिलाफ प्रदर्शन किया और पुतला फूंका।
प्रदर्शन कर रहे एबीवीपी कार्यकर्ताओं की मांग थी कि छात्रों को डीयू प्रवेश प्रक्रिया में न्याय , बढ़ी हुई कट-ऑफ़ को ठीक करना, नामांकन प्रक्रिया में राजकीय बोर्ड के नंबर को नॉर्मलाइज करके दाखिला दें, तत्काल प्रभाव से नामांकन प्रक्रिया को रोका जाए, नामांकन हेतु छात्रों की प्रारंभिक स्क्रीनिंग कराई जाए।
ध्यान हो कि दिल्ली विश्वविद्यालय ने 1 अक्टूबर को सत्र 2021-22 के नामांकन हेतु पहली कट ऑफ जारी की थी जिसमे पिछले वर्षो के तुलना में अनियमित उछाल देखी गयी। परिणाम स्वरूप 99 प्रतिशत अंक पाने वाले छात्र भी हिंदू, हंसराज, रामजस जैसे देश के प्रतिष्ठ महाविद्यालयों के दाखिले से वंचित रह गए। इस 100 प्रतिशत वाले कट ऑफ के कारण सबसे ज्यादा नुकसान सुदूर ग्रामीण इलाकों से आने वाले उन छात्रों को हुआ है जो पूरे साल दिल्ली विश्वविद्यालय में नामांकन हेतु मेहनत करते है एवं सीमित अवसरों और सीमित संसाधनों के साथ अपनी पढ़ाई करते है। इस ऊंचे कट ऑफ के कारण केवल कुछ राज्य बोर्ड के छात्र ही दिल्ली विश्वविद्यालय में प्रवेश ले पा रहे है। इस भेदभावपूर्ण व्यवहार के विरुद्ध पिछले 3 दिनों से अभाविप का दिल्ली विश्वविद्यालय में प्रदर्शन चल रहा है।
अभाविप प्रांत मंत्री सिद्धार्थ यादव ने कहा कि “विश्वविद्यालय के नकारेपन के कारण छात्रों का भविष्य ख़तरे में हैं। कुछ राज्यों के बोर्ड द्वारा अधिक अंक देने से देश के सभी छात्र न्याय से वंचित हैं। हम किसी एक बोर्ड या एक राज्य के विरुद्ध नहीं हैं, हमारी माँग है की देश के सभी राज्य एवं बोर्ड के विद्यार्थियों को समान प्रवेश का अवसर मिले। दिल्ली विश्वविद्यालय को कोरोना के इस विपरीत परिस्थिति में नामांकन हेतु कोई दूसरा विकल्प अपनाना चाहिए था।”
अभाविप की राष्ट्रीय महामंत्री सुश्री निधि त्रिपाठी ने छात्रों को सम्बोधित करते हुए कहा कि “दिल्ली विश्वविद्यालय की विशेषता डीयू की विविधता है लेकिन इस कट ऑफ के कारण गांव, कस्बों से आने वाले आम छात्र नामांकन से वंचित रह जायेंगे और डीयू की विविधता खत्म हो जाएगी, और केवल वही छात्र डीयू आ पाएंगे जिनके पास संसाधन और अवसर अधिक होंगे। इसलिए प्रशासन को इसके लिए को तत्काल प्रभाव से इसका समाधान करना चाहिए ताकि ग्रामीण परिवेश के छात्रों को न्याय मिल सके। हमारी माँग है की या तो छात्रों का स्क्रीनिंग टेस्ट कराए जाए या फिर अंकों का मानकीकरण किया जाए।