प्रमोद मिश्रा
उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जिले के मऊ ब्लाक में 57 ग्राम पंचायत हैं सभी ग्राम पंचायतों में 2 साल पहले ढाई लाख का एक शौचालय लागत लगा कर के बनाए गए। योगी बाबा की सरकार योजनाओं की झड़ी तो लगाती है और इसमें कर्मचारियों और अधिकारियों की भूमिका है कि हर कार्य को योजना का जनता तक पहुंचने में देरी करवा रहे हैं । मऊ ब्लाक के अब भी कुछ ग्राम पंचायतों के सामुदायिक शौचालय तो अभी आधे अधूरे भी पढ़े हैं फाइल में आलबेल कंप्लीट हो चुके हैं । लेकिन यह सच है कि हर गांव में सामुदायिक शौचालय बनकर तैयार भी है मऊ ब्लाक के 22-23 ग्राम पंचायतों में उत्तर प्रदेश राज्य आजीविका मिशन के तहत समूह में काम करने वाली महिलाओं को ₹6000 प्रतिमाह वेतन देकर ग्राम पंचायत के सामुदायिक शौचालय का संचालन करने की जिम्मेदारी मिलने का प्रावधान है।
अभी भी कुछ ग्राम पंचायतों में प्रधान सचिव आजीविका मिशन की समूह वाली महिलाओं से संपर्क किस हालात पर नहीं बना पा रहे हैं। आखिर इसका कारण क्या हो सकता है । सफाई कर्मी समूह वाली महिला को जिसको संचालन करना है उसको सरकार सरकार का वेतन देना है। जो पंचायती राज की तरफ से मिलना है ।सचिव प्रधान को देना है तो क्यों नहीं संचालित करा रहे हैं ।बाकी पड़े ग्राम पंचायतों के सामुदायिक शौचालय को ग्राम पंचायतों में 12000 के शौचालय तो बहुत से बने लेकिन कुछ शोपीस ही बनकर रह गए। लेकिन यह अच्छी तरह से तैयार हुए हैं और गांव में शहर जैसे सामुदायिक शौचालय दिखते हैं इनमें इमरजेंसी में गांव का आदमी , रिश्तेदार कोई भी आएगा थोड़ा शुल्क उपर्युक्त लोगों द्वारा दिया जाएगा । पंचायतों के सामुदायिक शौचालय का संचालन करने वाली महिला को ₹200 प्रतिदिन मजदूरी से काम करेगी जिसमें उसको ₹3000 रू 3 महीने में आएगा साबुन सफाई की चीजों के लिए ।
उत्तर प्रदेश सरकार ने उत्तर प्रदेश के सभी ग्राम पंचायतों में सामुदायिक शौचालय बनवाया है जिसमें गांवों का शोभा भी बढ़ी है। यह गांवो में बने सामुदायिक शौचालय स्वच्छता अभियान के तहत एक प्रमुख केंद्र बिंदु भी है कुछ ग्राम पंचायतों के प्रधानों व सचिवों की सहूलियत व्यवहार से छिवलहा, डोडिया माफी, रैपुरा ,बंबुरी गाहुर, बरगढ़ ,इटहा देवीपुर ,चित्रवार आदि ऐसे ही 22-23 ग्राम पंचायतों में सामुदायिक शौचालय का संचालन शुरू हो चुका है। अभी 57 में से जो बाकी सामुदायिक शौचालय बंद पड़े हैं जकड़े हुए हैं 2 साल से खुलकर के संचालित नहीं हो रहे हैं जिससे गांव में रहने वाले लोगों को योजना का लाभ नहीं मिलता है और लोगों को परेशानी होती है।