मुंबई में अंतरधार्मिक नातिया मुशायरे ने स्थापित किया सद्भाव और सांस्कृतिक एकता का उदाहरण

Aanchalik Khabre
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प्रॉफिट फॉर ऑल

सैय्यद जाहिद अली रियासत

मुंबई। इस्लाम जिमखाना, मरीन लाइन्स के सेलिब्रेशन हॉल में “प्रॉफिट फॉर ऑल” अभियान के तहत आयोजित एक भव्य नातिया मुशायरे ने धार्मिक सद्भाव और सांस्कृतिक समृद्धि का अनूठा उदाहरण प्रस्तुत किया। इस कार्यक्रम में विभिन्न धर्मों और समुदायों के शायरों ने भाग लेकर नात के माध्यम से प्रेम, भक्ति और मानवता का संदेश प्रसारित किया।

कार्यक्रम का उद्देश्य और महत्व
यह मुशायरा “मुहम्मद सबके लिए” अभियान का हिस्सा था, जिसका उद्देश्य पैगंबर मुहम्मद के सार्वभौमिक संदेश को विभिन्न समुदायों तक पहुँचाना और अंतरधार्मिक संवाद को बढ़ावा देना है। कार्यक्रम के प्रभारी फरीद अहमद खान (उर्दू कारवां के अध्यक्ष) ने इसके उद्देश्यों को रेखांकित करते हुए कहा कि यह महफिल सांप्रदायिक एकता और साझा मानवीय मूल्यों को Celebrating करने का एक मंच है।

गैर-मुस्लिम शायरों की Meaningful भागीदारी
इस मुशायरे की विशेषता विभिन्न धर्मों के शायरों की सक्रिय भागीदारी थी। डॉ. लक्ष्मण शर्मा ‘वहिद’ ने कहा, “नात लिखना और पढ़ना केवल एक धार्मिक अभ्यास नहीं है, बल्कि एक आध्यात्मिक अनुभव है जो हमें मानवता के करीब लाता है।” अद्धू महाजन ‘बिस्मिल’ ने जोर देकर कहा, “पैगंबर मुहम्मद की शिक्षाएं पूरी मानवजाति के लिए मार्गदर्शन हैं।”

विशिष्ट अतिथि और उनका योगदान
मुशायरे की अध्यक्षता प्रसिद्ध कवि डॉ. सागर त्रिपाठी ने की, जिन्होंने कहा कि “प्रॉफिट फॉर ऑल” अभियान से जुड़कर उन्हें गर्व महसूस हो रहा है। एडवोकेट यूसुफ इब्राहिमी (इस्लाम जिमखाना के अध्यक्ष) ने संरक्षक की भूमिका निभाई। मौलाना क़मर सुल्तान पुरी विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। प्रसिद्ध गायिका अनुष्का निकम ने उर्दू और मराठी में अपनी प्रस्तुति से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ और काव्य पाठ
महफिल की शुरुआत मिशाल रिजवी की कुरआन तिलावत और तौफीक फाखरी की हम्द से हुई। डॉ. कासिम इमाम ने उद्घाटन कविता प्रस्तुत की। मुशायरे में डॉ. लक्ष्मण शर्मा ‘वहिद’, अद्धू महाजन ‘बिस्मिल’, अनंत नंदुरकर ‘खलिश’, हुकुमचंद कोठारी ‘असघर’, हीरालाल ‘हीरा’, उबैद अज़म ‘अज़मी’, इरफ़ान जाफ़री, सुहैल अख्तर वारसी, डॉ. क़मर सिद्दीकी, अज़हर हुसैन, रुसतम इलाहाबादी और मिशाल रिजवी जैसे शायरों ने अपना कलाम पेश किया।

सामाजिक संदेश और समापन
इस आयोजन ने साबित किया कि कला और साहित्य धार्मिक सीमाओं से ऊपर उठकर लोगों को जोड़ सकते हैं। कार्यक्रम का समापन फरीद अहमद खान के आभार प्रदर्शन के साथ हुआ। इस अवसर पर डॉ. ज़ेब-उन-निसा मलिक सहित कोर कमेटी के सदस्य उपस्थित रहे।

यह मुशायरा न केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम था, बल्कि सामाजिक सौहार्द और धार्मिक सद्भाव की एक जीवंत मिसाल पेश की, जो आज के समय में अत्यंत प्रासंगिक है।

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