बांदकपुर में रचा इतिहास ऐतिहासिक रथ यात्रा संपन्न-आँचलिक ख़बरें-भगवत सिंह लोधी

News Desk
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दमोह जिले के सिद्ध क्षेत्र बादकपुर मे रथयात्रा संपन्न भगवान के रथ का सारथी जन्म जन्म का पुण्यात्मा होता है–मुनि निष्कंप सागर जी

 

कुंडलपुर के बड़े बाबा की तलहटी में उन्हीं की एनर्जी से प्राप्त फलता फूलता छोटा सा नगर बांदकपुर में विगत 8 दिवस से अष्टानिको के महापर्व में श्री 1008 सिद्धचक्र महामंडल विधान का आयोजन हुआ इसका समापन नगर गज रथ यात्रा बग्गी घोड़े हाथी बैंड बाजों के साथ एवं इस युग के महान जैन आचार्य आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज के आशीर्वाद एवं उनके ही परम प्रभाविक शिष्य पुज्य निर्यापक मुनिश्री 108 समता सागर जी महाराज पूज्य मुनि श्री 108 महा सागर जी महाराज पूज्य मुनि श्री 108 निष्कंप सागर जी महाराज ऐलक निश्चय सागर जी महाराज जी के सानिध्य में एवं विधान आचार्य बाल ब्रह्मचारी दीपक भैया के कुशल मार्गदर्शन में प्रभावना पूर्ण आनंद पूर्वक संपन्न हुआ समापन की इस बेला में प्रातः काल में मंदिर जी में स्थित मान स्तंभ मेविराजमान श्री पारसनाथ भगवान जी का वार्षिक अभिषेक शांतिधारा हुई इसके बाद मुनि श्री समता सागर जी महाराज ने अपने उपदेश में कहां की सम्यक दृष्टि के आठ अंगों में प्रभावना भी एक अंग है अगर शरीर के अंगों में एक अंग भी कम हो जाए तो वह विकलांग कहलाता है इसी प्रकार सम्यक दृष्टि के 8 अंगों में एक भी अंग कम रहे तो वह सम्यक दृष्टि नहीं कहलाता यानी विकलांग के समान होता है महाराज श्री ने कहा कि जिस प्रकार रानी उर्मिला ने प्रण लिया की सर्वप्रथम मेरे जिनेंद्र देव का रथ नगर में निकलेगा तो ही मैं अन्न जल ग्रहण करूंगी यह बात जब ब्रज कुमार मुनि को ज्ञात हुई तो उन्होंने विद्याधरो को आदेश दिया कहा रानी उर्मिला सम्यक दृष्टि है धर्म पर उपसर्ग है 8 दिनों की उपवास है जाकर जिनेंद्र भगवान का रथ निकालो और धर्म की प्रभावना करो विद्याधरओ ने ऐसा ही किया बहुत धर्म की प्रभावना हुई इसी प्रकार यहां भी हो रही है इसके पश्चात मुनि श्री निष्कंप सागर जीने अपने प्रवचनों में कहा कि भगवान के रथ का सारथी जन्म जन्म का पुण्य आत्मा जीव होता है हर कोई जिनेंद्र भगवान के रथ को नहीं खींच सकता जिन्होंने जिनेंद्र देव का सारथी बन लिया वह जीवन में कभी पैदल नहीं चलेगा उसके आगे पीछे कई लग्जरी गाड़ी रहेगी अर्जुन ने भी महाभारत में श्री कृष्ण को सारथी बनाया युद्ध में विजय प्राप्त भी की कौरवों ने धन वैभव को चाहा उनकी दुर्गति हुई अर्जुन ने धर्म को चाहा उसकी सद्गति हुई धन चाहोगे तो विनाश होगा धर्म चाहोगे तो विकास होगा इसके पश्चात दोपहर में रथ यात्रा का आयोजन किया गया जिसमें रथ पर जिनेंद्र भगवान को बैठाया गया सौधर्म इंद्र बने सुनील डबुल्या ने भगवान को रथ में बैठाया भगवान के रथ के सारथी बनने का सौभाग्य अनुज सिघई बने हाथी पर श्रीपाल मैना सुंदरी बने अमन मोनिका डबुल्या बैठे भरत दीपक डबुल्या बाहूवली विवेक सिघई कुबेर जिनेंद्र जैन पिपरिया ईशान इंद्र प्रदीप डबुल्या सनत कुमार इंद्र श्रीपाल जैनपिपारिया महेंद्र संजय जैन अष्ट कुमारिया विधान के यह सभी पात्र अश्व रथ पर सवार होकर निकले इनके साथ समाज के सभी नवयुवक केसरिया रंग की पगड़ी बांधकर डीजे के झंकार धुन पर नृत्य करते हुए चल रहे थे मुनि संघ के साथ विधान में जितने भी बाकी के इंद्र व सहयोगी थे सभी चल रहे थे बांदकपुर के इतिहास में इतना लंबा जुलूस कभी नहीं निकला श्री जी का रथ जिस किसी के भी घर के सामने से निकला सभी ने भगवान की आरती उतारी इस कार्यक्रम में बांदकपुर की आस-पास की गांवों के हजारों लो एकत्रित हुई सभी को प्रसाद वितरण किया गया

 

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