जिले में 26 अप्रेल को कृषि मेले का आयोजन
आजादी के अमृत महोत्सव के तहत जिले में कृषि मेले का आयोजन
‘‘मानव पीढ़ी को संजोये रखने में प्राकृतिक खेती की अहम भूमिका‘‘
‘‘सषक्त किसान ही समृद्ध और मजबूत राष्ट्र की आधारषीला‘‘
झाबुआ, 26 अप्रेल 2022। कृषि विज्ञान केन्द्र और कृषि विभाग के सयुक्त तत्वाधान में ‘‘किसान भागीदारी प्राथमिकता हमारी’’ अभियान अन्तर्गत आज दिनांक 26 अप्रैल 2022 को कृषि मेले का आयोजन कृषि विज्ञान केन्द्र के प्रक्षेत्र में किया गया। भारत सरकार द्वारा आजादी का अमृत महोत्सव को जन भागीदारी उत्सव के रूप में मनाये जाने के लिये विभिन्न कार्यक्रमों का श्रंखलाबद्ध आयोजन किया जा रहा है। कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय भारत सरकार द्वारा विभिन्न मंत्रालयों और विभागो के सहयोग समन्वय से आजादी का अमृत महोत्सव के तहत 25 अप्रेल से 30 अप्रेल 2022 के दौरान ‘‘किसान भागीदारी प्राथमिकता हमारी’’ अभियान का आयोजन किया जा रहा है। ‘‘किसान भागीदारी प्राथमिकता हमारी’’ अभियान के दौरान प्रतिदिन विभिन्न क्षेत्रको पर केन्द्रीत कार्यक्रमो का चरण बद्ध रूप से पृथक-पृथक आयोजन नियोजित है।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि गुमानिंसंहजी डामोर, सासंद झाबुआ-रतलाम संसदीय क्षेत्र, सोमेष मिश्रा, कलेक्टर जिला झाबुआ की अध्यक्षता में किया गया, जिसमें विषिष्ट अतिथियों के रूप में नायक, जिला अध्यक्ष भाजपा, कलसिंह भाबर, भूतपूर्व विधायक एवं प्रदेष अध्यक्ष अ.ज.जा मोर्चा, रूपसिंह डामोर, सभापति, जिला पंचायत कृषि स्थाई समिति, सोमसिंह सोलंकी जिला महामंत्री भाजपा आदि की गौरवमय उपस्थिति रही।
इस कार्यक्रम में जिले के विभिन्न शासकीय, अशासकीय विभागों की योजनाओं, कृषि क्षेत्र से जुडी संस्थाओं और उद्यमियों के उत्पादों और नवीन तकनीक से संबंधित जानकारी से कृषकों को सुपरिचित करवाने के उद्देश्य से कृषि विज्ञान केन्द्र, किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग, पषुपालन, मत्स्यपालन, उद्यान विभाग, सहकारिता विभाग, आयुष विभाग, मुख्य चिकित्सा विभाग तथा जैविक खेती करने वाले किसान दलसिंह ग्राम नरसिंहपुरा एवं मूलचंद परमार ग्राम सजेली मालजी साथ द्वारा स्टॉल के रूप में प्रदर्शनी लगायी गई।
इस कार्यक्रम का शुभारम्भ वर्चुअल मोड पर नरेंद्र सिंह तोमर केन्द्रीय कृषि मंत्री, कृषि एवं किसान कल्याण भारत सरकार द्वारा किया गया तथा जिले में जिला स्तरीय कृषि मेले का शुभारम्भ माँ सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलित कर उपस्थित मुख्य अतिथि सासंद डामोर एवं कलेक्टर तथा उपस्थित अन्य अतिथियों द्वारा किया गया।
इस कार्यक्रम की शुरूआत करते हुए डॉ. आई.एस. तोमर, वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख कृषि विज्ञान केन्द्र झाबुआ द्वारा उपस्थित मंचासीन अतिथियों एवं किसान भाईयों का स्वागत करते हुए आज के आयोजन कार्यक्रम के उद्देष्य एवं महत्व बताते हुए कहा की खेती किसानी पर आधारित आजीविका उन्नयन की दृष्टि से प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना, कम लागत की नवीन कृषिगत तकनीक, युक्तियों को अपनाते हुए कम लागत में अधिक उत्पादन करते हुए खेती को लाभ का धंधा बनाया जा सकता है जो कि मानव स्वास्थ्य एवं पर्यावारण के अनुकूल कृषि तकनीकि है। कार्यक्रम को आगे बढाते हुए नगीन सिंह रावत उप संचालक कृषि द्वारा आयोजित कृषि मेले की विस्तृत रूपरेखा पर प्रकाष डाला एवं कृषि विभाग द्वारा संचालित किसान हितैषी केन्द्रीय एवं राज्य पोषित योजनाओं की जानकारी, और कृषि के क्षेत्र में हो रहे परिवर्तनों से सुपरिचित करवाया गया। सांसद डामोर द्वारा अपने उदबोधन में जैविक खेती व प्राकृतिक खेती के विभिन्न आयामों के साथ-साथ किसान समुदाय और आमजन को होने वाले फायदो तथा विपणन के लाभ बताये और बताया की एक देषी गाय के गोबर से 30 एकड. क्षेत्र में बिना लागत की प्राकृतिक खेती की जा सकती है जो जिसका उत्पादन रासायनिक खेती के उत्पादन के बराबर उत्पादन देने के साथ भूमि की उर्वरा शक्ति को भी बढ़ती है एवं मानव स्वास्थ्य तथा पर्यावारण में भी सुधार करती है। साथ ही आपने बताया की सिक्किम देष का पहला प्रदेष है जहां पूर्ण रूप से प्राकृतिक खेती की जा रही है। साथ ही रासायनिक खेती से प्राप्त होने वाले उत्पादों के सेवन से मानव स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव के बारे में बताया गया। मुख्य अतिथि सांसद गुमानसिंह डामोर ने संबोधित करते हुए आव्हान किया कि सषक्त किसान समाज ही समृद्ध और मजबूत राष्ट्र की आधारषीला है। डामोर ने किसानों की देष अर्थवव्यस्था में योगदान को अपरिहार्य बताते हुए कहा कि मानव पीढ़ी को संजोये रखने में प्राकृतिक खेती की अहम भूमिका है।
भाबोर ने अपने उदबोधन में लगातार रासायनिक खेती से बंजर हो रहे खेतों की चर्चा की व किसानों को आव्हान किया की वे ज्यादा से ज्यादा जैविक खेती एवं प्राकृतिक खेती को अपनाकर भूमि की उवर्रा शक्ति को बरकरार रखते हुए स्वयं का बीज स्वयं का खाद स्वयं की दवाई तैयार कर फसल उत्पादन की लागत को कम कर खेती को लाभ का धंधा बना सकते है।
तकनीकी सत्र में डॉ. चन्दन कुमार, डॉ जगदीष मोर्य एवं डॉ. वी.के. सिंह द्वारा किसानों को कृषि वैज्ञानिकों द्वारा खेती की नवीनतम तकनीकों नवीनतम कृषि यंत्रों तथा प्राकृतिक खेती की करने की तकनीक एवं उसकी विभिन्न विधाओं एवं कीट एवं व्याधि से फसलों को बचाने हेतु प्राकृतिक रूप से तैयार उत्पाद से कीट नियंत्रण के तरीकों को विस्तारपूर्वक बताया गया। इसी कड़ी में प्रगतिषील कृषक बालाराम पाटीदार ने जैविक एवं प्राकृतिक खेती के बारे में अपने अनुभव को किसानों के साथ साझा किया।
कार्यक्रम के अतः में उपस्थित अतिथियों द्वारा जिले के जैविक एवं प्राकृतिक खेती करने वाले कृषकों दलसिंह नरसिंपुरा, मूलचंद सजेली माली साथ, श्रीमति अन्नुबाई भूराडाबरा, मुकेष सुतरेटी का शाल, श्रीफल एवं प्रषस्ति पत्र से सम्मानित किया गया। अतिथियों द्वारा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना अन्तर्गत बीमित कृषकों बदिया मंगलिया, अलकेष हेमसिंह मावी, कैलाष पांचाल, पस्वा विरिया, मानसिंह सकरू हटिला, शंकर कालिया खपेड़, भूरा सकरा इत्यादि को ‘‘मेरी पॉलिसी मेरे हाथ‘‘ के तहत प्रत्यक्षतः फसल बीमा प्रदान की गई।
कार्यक्रम का संचालन गोपाल मुलेवा एवं डॉ. आर.के. त्रिपाठी द्वारा किया एवं कार्यक्रम का आभार प्रदर्षन जी.एस. त्रिवेदी परियोजना संचालक आत्मा ने किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग एवं कृषि विज्ञान केन्द्र के समस्त वैज्ञानिक, अधिकारी/कर्मचारी एवं समस्त मैदानी अमले का सहयोग प्रषंसनीय रहा।
‘‘किसान भागीदारी प्राथमिकता हमारी’’ अभियान-आंचलिक ख़बरें-राजेंद्र राठौर

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