परिसीमन विवाद से कैसे निकला जम्मू कश्मीर को
नरेन्द्र मोदी बंगाल में अपनी पार्टी को एक मजबूत स्थिति में लाने के बाद केंद्र सरकार को भी मिशन अगस्त के लिए एक बार फिर तैयार कर रहे हैं। 2019 में ऐतिहासिक धारा 370 को रद्द करने के बाद अगस्त2020 में राममंदिर का नीव पूजन कर अपने चुनावी वादे को पूरा कर लोगों को यहां विश्वास दिलाया कि मोदी सरकार घोषणा पत्र के हिसाब से ही काम कर रही है। इसी क्रम में अब 2021 के अगस्त महीने में मोदी सरकार क्या करने जा रही है इसकी बानगी तब देखने को मिली जब बंगाल के चुनाव सम्पन्न होते ही अर्धसैनिक बलों को फिर से कश्मीर रवाना कर दिया गया तब से सोशल मीडिया में हलचल तेज हो गई थी।
केंद्र सरकार अलग-अलग खबरें और कयासों के बीच हर कोई ख्यालों के तीर छोड़ रहा था कि राज्य में कोई बड़ा उलटफेर या कोई बड़ी गतिविधि हो सकती है।जब भारत सरकार जम्मू कश्मीर राज्य का दर्जा समाप्त करने के बाद कश्मीर के नेताओं को दिल्ली बातचीत के लिए बुलाया तो अब लोगों को यकीन हो गया कि अगस्त में फिर कुछ नया जरूर होगा। और अब उम्मीद और प्रबल हो गया है कि जम्मू कश्मीर में कुछ नया तो जरूर होगा या फिर नया जम्मू कश्मीर होगा। इसकी तैयारी के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजनीतिक दलों की बैठक कर ये संदेश भी दे दिया है कि कश्मीर में जो अब तक हुआ वो आगे भी होगा ये अब संभव नहीं। राज्य और देश की हितों के लिए वो हर संभव कदम उठाने में मोदी सरकार पीछे नहीं रहेगी। 24 जून को पीएम नरेंद्र मोदी की बैठक के बाद अब तस्वीरें स्पष्ट हो गया कि पाकिस्तान के मनसूबों को ठिकाने लगाने के लिए मोदी सरकार जम्मू कश्मीर का कायाकल्प करने जा रही है।जो लोग यह कह रहे थे कि हर बार उन्हें बुलाकर मोदी सरकार क्या करना चाहती है तो उन्हें अब जबाब मिल गया।
जम्मू कश्मीर में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले परिसीमन को लेकर तैयारियां में तेजी आ गई है जो गत वर्ष कोरोना के कारण रुक सा गया था। अब सभी राजनीतिक दलों के नेताओं से प्रधानमंत्री की मुलाकात के बाद अब परिसीमन आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त सुशील चंद्रा के साथ केन्द्र शासित प्रदेश जम्मू कश्मीर का 6 जुलाई से लेकर 9 जुलाई तक यात्रा करने जा रही है। इस दौरान राजनीतिक दलों, केन्द्र शासित प्रदेशों के अधिकारियों और जनता के नुमाइंदों से भी चर्चा करेगी।वही नेशनल कॉन्फ्रेंस के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने कहा कि पहले जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा मिले फिर चुनाव हो। उन्होंने कहा कि हमें पहले डिलिमिटेशन (परिसीमन) उसके बाद चुनाव और फिर राज्य का दर्जा मंजूर नहीं है।हम पहले परिसीमन फिर राज्य का दर्जा और तब जाकर चुनाव चाहते हैं।
उमर अब्दुल्ला ने कहा, गुलाम नबी आजाद ने हम सबकी तरफ से वहां बात की और कहा कि हम ये टाइमलाइन नहीं मानते हैं।डिलिमिटेशेन, चुनाव और राज्य का दर्जा नहीं. पहले डिलिमिटेशन फिर राज्य का दर्जा फिर चुनाव। चुनाव कराना ही है तो पहले राज्य का दर्जा लौटा दीजिए।उसके बाद हम चुनाव पर बात करेंगे।
नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता ने आगे कहा, वहां किसी ने प्रधानमंत्री से नहीं कहा कि हम 5 अगस्त कबूल करते हैं।हमने कहा कि हम इससे नाराज हैं. पीएम से महबूबा मुफ्ती और फारुख अब्दुल्ला ने साफ कहा कि बीजेपी को 370 हटाने का एजेंडा कामयाब कराने में 70 साल लगे।हमें 70 महीने लगेंगे तो भी हम अपने मिशन से पीछे नहीं हटेंगे।
24 जून की बैठक के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जम्मू कश्मीर में जल्द चुनाव की दिशा में कदम उठाए जाएंगे। इसके साथ ही पीएम मोदी ने कहा था कि दिल्ली और दिल की दूरियों को कम किया जाएगा इसके लिए परिसीमन को जरूरी बताया था क्योंकि इससे ज्यादा से ज्यादा लोगों को मतदान की प्रक्रिया में शामिल किया जा सके। जम्मू कश्मीर के जनता को उचित प्रतिनिधित्व के लिए परिसीमन का होना अनिवार्य है इससे जम्मू को विधानसभा में उचित स्थान मिलेगा जो अभी तक कश्मीर को ही मिला था ।pok के इलाकों में इससे फायदा मिलेगा। जिससे उसे भारत में शामिल करने में भी मदद मिलेगा।भारत अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी यह बता चुका है pok भारत का अभिन्न हिस्सा है और ये देश का ही आंतरिक मामलों में एक है।