चक्रदार महोत्सव में कलाकारों ने दिखाई काव्य शैली का जलवा-आंचलिक खबरे-अश्विनी कुमार श्रीवास्तव

News Desk
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अपनी रचनाओं से होली के पर्व का कराया अनुभव

चित्रकूट । नादऑरा संस्थान दिल्ली एवं उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी के संयुक्त तत्वावधान में बुधवार को हुए शास्त्रीय संगीत समारोह में राग-रागिनी की तरंग में लोग झूम उठे। तबला महर्षि पंडित अनोखेलाल मिश्र व पंडित छोटेलाल मिश्र की स्मृति में इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कलाकारों ने अपनी रचनाओं से लोगों को होली पर्व का अनुभव कराया।
कार्यक्रम का उद्घाटन जिलाधिकारी शुभ्रांत कुमार शुक्ल ने दीप प्रज्ज्वलन कर किया। दिव्यांग विश्वविद्यालय की डॉ. ज्योति ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। इसमें तबले पर डॉ. विवेक फड़नीस एवं हारमोनियम पर डॉ. गोपाल मिश्रा ने संगत की। पुणे के मनोज सोलंकी ने मृदंग वादन से मोहा। वादन में चक्रदार रचनाओं से चक्रदार महोत्सव की सार्थकता सिद्ध की। हारमोनियम पर संगत ललित सिसोदिया दिल्ली ने की। दिल्ली के शंकर बंधुओं संजीव शंकर एवं अश्वनी शंकर ने शहनाई वादन में राग मारू बिहाग की बंदिश एवं राग काफी में धुन बजाकर लोगों को संगीत रस में सराबोर किया। तबला पर डॉ. कुमार ऋषितोष एवं दुक्कड़ पर आनंद शंकर ने संगत की। बनारस के किशन रामडोहकर ने तबला वादन से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। काशी हिंदू विश्वविद्यालय के गायन विभाग के डॉ. राम शंकर ने पंडित रामाश्रय झा रामरंग की संगीत रामायण की बंदिश से राग नट झपताल में प्रथम प्रस्तुति दी। इसमें बंदिश के बोल थे ‘‘मूल नक्षत्र दिन शुकल पख पावन, हुलसी जायो सुवन नाम राम बोला‘‘। तत्पश्चात द्रुत तीनताल में ‘‘बंदऊ चरण कमल तुलसी के‘‘ प्रस्तुत कर लोगों को गोस्वामी जी की पावन स्मृति का अवगाहन कराया। राग काफी में ठुमरी प्रस्तुत की जिसके बोल थे ‘‘अखियां डारे गुलाल लाल नंद को री‘‘। अंत में होली के अवसर को देखते हुए होरी के पद के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया। कार्यक्रम में नादऑरा संस्था के डा. रामशंकर, श्री किशन रामडोहकर, शंकर बंधु एवं डॉ. गोपाल कुमार मिश्र को संगीत के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए नाद रत्न से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के संयोजक डॉ. गोपाल कुमार मिश्र ने बताया कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य कला एवं संगीत की सांस्कृतिक धरोहरों का संरक्षण, संवर्धन एवं कला प्रेमियों के बीच कलाओं के आदान-प्रदान का माध्यम बनाना है। वर्तमान में शास्त्रीय संगीत के बड़े आयोजनों के न होने से इस क्षेत्र में शास्त्रीय संगीत की उपेक्षा हुई है। इस कमी को पूरा करने के लिए ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। कार्यक्रम का संचालन डॉ. राजा पांडे ने किया एवं संस्था अध्यक्ष डॉ. ऋषितोष ने सभी का आभार जताया।

 

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