बेकार जमीन का उपयोग करना सिखायेगा सेडमैप-आंचलिक ख़बरें-रमेश कुमार पाण्डे

News Desk
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औषधीय एवं सुगंधीय पौधों की खेती, प्रसंस्करण और विपणन पर 05 दिवसीय प्रशिक्षण 27 से भोपाल में

जिला कटनी – मध्य प्रदेश में औषधीय सगंधीय पौधों की खेती, प्रसंस्करण और विपणन संभावनाओं पर उद्यमिता विकास केंद्र मध्यप्रदेश (सेडमैप) द्वारा 05 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। यह प्रशिक्षण पूरी तरह से अरहवासी रहेगा, जो 27 से 31 जनवरी तक उद्यमिता भवन, 16-ए अरेरा हिल्स भोपाल में आयोजित किया जाएगा। इच्छुक व्यक्ति 25 जनवरी 2023 तक आवेदन कर सकते हैं।

सेडमैप के वरिष्ठ प्रशिक्षक डॉ. वेद प्रकाश सिंह ने बताया कि जो भी व्यक्ति औषधीय सगंधीय पौधों की खेती, प्रसंस्करण और विपणन में रूचि रखते हैं वे इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में सम्मिलित हो सकते हैं। प्रशिक्षण के इच्छुक व्यक्ति मोबाइल नंबर 9425386409, 9479935845 या ईमेल चउनीमंक.बमकउंच/हउंपस.बवउ पर सम्पर्क कर सकते हैं। प्रशिक्षण में सम्मिलित होने के लिए पूर्व पंजीयन कराया जाना आवश्यक है।

प्रशिक्षण में प्रमुख औषधीय पौधे जैसे सफेद मूसली, सतावरी, अश्वगंधा, सर्पगंधा, कालमेघ आदि और सगंधीय पौधे जैसे मेन्था, लेमनग्रास, पामारोजा, सिट्रोनेला, गुलाब, जामा रोजा, गेंदा आदि के कृषिकरण तकनीक, प्रसंस्करण और मार्केटिंग पर मार्गदर्शन प्रदान किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि कृषि को लाभ का व्यवसाय बनाने, कृषकों की आय और सामुदायिक स्वास्थ्य के स्तर में वृद्धि करने के उद्देश्य से औषधीय सगंधीय पौधों की खेती, प्रसंस्करण और विपणन पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है, जिसमें वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद तथा भारतीय कृषि अनुसंधन परिषद और कृषि विश्वविद्यालयों के वैज्ञानिक एवं विषय विशेषज्ञ प्रशिक्षण प्रदान करेंगे, इस दौरान एक दिवसीय फील्ड विजिट का आयोजन भी किया जाएगा।

प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य कृषकों के भीतर औषधीय एवं सगंधीय पौधों की वैज्ञानिक कृषिकरण तकनीक, प्रसंस्करण एवं विपणन के संदर्भ में जानकारी प्रदान करना है, जिससे वे इस प्रकार की कृषि को अपनाकर अपनी आमदनी को बढ़ा सकें तथा उनके पास उपलब्ध ऐसी भूमि जिसपर वे परंपरागत खेती करने में असमर्थ हैं, उनका भी विवेकपूर्ण उपयोग करते हुए ऐसी भूमि पर भी खेती कर लाभ कमा सकें, जैसे अनुपजाऊ भूमि, जलप्लावित भूमि, बंजर भूमि, छायादार भूमि, पड़ती भूमि आदि का उपयोग कर अधिक मुनाफा कमा सकते हैं।

सेडमैप के वरिष्ठ प्रशिक्षक डॉ. वेद प्रकाश सिंह ने बताया कि औषधीय सगंधीय पौधों की खेती की कृषिकरण तकनीक, परंपरागत फसलों के कृषिकरण की तकनीक की तुलना में अधिक सरल है। औषधीय सगंधीय फसलों की बाजार में अच्छी मांग के कारण इन फसलों की खेती परंपरागत फसलों की तुलना में तुलनात्मक रूप से अधिक लाभकारी है। औषधीय सगंधीय पौधों की खेती, किसानों के पास पड़ी अनुपजाऊ भूमि, जलप्लावित भूमि, बंजर भूमि, छायादार भूमि, पड़ती भूमि पर भी की जा सकती है।

औषधीय सगंधीय पौधों पर प्रशिक्षण कार्यक्रम इसलिए भी आयोजित किया जा रहा है, क्योंकि इससे परंपरागत खेती की तुलना में प्रति एकड़ आमदनी अधिक हो सकती है। इन फसलों की बुवाई तथा कटाई-गहाई का समय परंपरागत फसलों की बुवाई, कटाई-गहाई से अलग होता है, परिणामस्वरूप ग्रामीण अंचल में सरलता से कृषि श्रमिकों की उपलब्ध सुलभ हो सकती है।

औषधीय सगंधीय फसलों के प्रसंस्करण से ग्रामीण क्षेत्र में अधिकाधिक रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे। अधिकांश औषधीय फसलें किसी रोग-व्याधि के शमन के लिए इस्तेमाल की जाती हैं। अतः इनमें रोग प्रतिरोधक क्षमता अधिक होने के कारण रोग व्याधि से नुकसान की संभावनाएं भी अल्प होती हैं, सगंधीय फसलों में एक खास प्रकार की गंध होने के कारण आवारा मवेशियों के द्वारा नुकसान पहुंचाने की संभावना भी अल्प होती है तथा अन्य औषधीय फसलों को भी जानवर नहीं चरते हैं। इस कारण औषधीय एवं सगंध फसलों की खेती कृषकों के लिए अधिक लाभदायक है।

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