8 से 10 जनवरी के दौरान आयोजित होगा अंतर्राष्ट्रीय बौद्धिक सम्पदा सम्मलेन-आंचलिक ख़बरें-नदीम चौधरी

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8 से 10 जनवरी के दौरान आयोजित होगा अंतर्राष्ट्रीय बौद्धिक सम्पदा सम्मलेन सम्मेलन में 25 से अधिक देशों के विषेशज्ञ ‘‘डिसरप्टिव इनोवेशन एवं रिथिंकिंग आईपी विषय पर पर चर्चा करेंगे .नई दिल्ली बौद्धिक संपदा से जुड़ी चुनौतियों एवं समस्याओं के समाधान से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा के लिए अन्तराष्र्ट्रीय व्यापार संस्थान (सेंटर फार डब्ल्यूटीओ स्टडीज) तथा आईटीएजी बिजनेस सोलूशन्स लिमिटेड संयुक्त रूप से 12वां ग्लोबल आईपी सम्मेलन नई दिल्ली में आठ से 10 जनवरी के दौरान आयोजित कर रहा है।इस उदघाटन समारोह में केन्द्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमन मुख्य अतिथि होंगी।

सम्मेलन का विषय डिसरप्टिव इनोवेषन एंड रिथिंकिंग इंटलेक्चुयल प्रोपर्टी है। इस त्रिय दिवसीय सम्मेलन में करीब 25 देशों के 500 से अधिक प्रतिनिधि एवं 100 से अधिक वक्ता हिस्सा लेंगे। विज्ञान भवन में 8 जनवरी को इनोवेशन अवार्ड समारोह आयोजित होगा जिसमें पूर्व केन्द्रीय रेल मंत्री तथा जी 20 बैठक के लिए प्रधानमंत्री के शेरपा श्री सुरेष प्रभु मुख्य अतिथि होंगे। इस सम्मेलन में 8 पूर्ण सत्रों के अलावा 23 तकनीकी सत्र आयोजित होंगे। सम्मेलन के दूसरे दिन 9 जनवरी एवं तीसरे दिन 10 जनवरी को तकनीकी सत्र का आयोजन ली मेरीडियन होटल में होगा।

अंतर्राष्ट्रीय व्यापार संस्थान के संस्थापक न्यासी डा. धनपत राम अग्रवाल ने जानकारी देते हुए बताया कि सम्मेलन में बौद्धिक संपदा से जुड़े विभिन्न विषयों तथा इस क्षेत्र में भारतीय इनोवेटरों के समक्ष आने वाली चुनौतियों के समाधान के बारे चर्चा होगी। उन्होंने कहा कि इनोवेशन और प्रोद्योगिकी के इस युग में किसी भी देश के आर्थिक विकास में बौद्धिक संपदा की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका है। मिसाल के तौर पर अमरीका की जीडीपी में बैद्धिक संपदा का योगदान 6 ट्रिलियन अमरीकी डालर के बराबर का है जो भारत की जीडपी से करीब दोगुना है। अगर भारत को एक शक्तिशाली अर्थव्यवस्था वाला देश बनाना है तो भारत की अर्थव्यवस्था में ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था के योगदान को बढ़ाना पड़ेगा। चीन ने ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था को काफी विकसित किया और यही कारण है कि आज चीन की जीडीपी करीब 14 ट्रिलियन है जो भारत की जीडीपी से करीब पांच गुना अधिक है। डा. धनपत राम अग्रवाल ने कहा कि भारत कें हालांकि राष्ट्रीय आईपीआर नीति है और पेटेंट के आवेदनों में वृद्धि हुई है लेकिन अभी अनुसंधान के क्षेत्र में बहुत अधिक निवेष किए जाने तथा मजबूत आईपी इको प्रणाली विकसित किए जाने की जरूरत हैं इसके लिए स्कूल स्तर से ही बौद्धिक संपदा के बारे में जागरूकता कायम करने के लिए देशव्यापी अभियान की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि इस सम्मेलन में बैद्धिक संपदा के बारे में जारूकता अभियान के बारे में रूपरेखा तय की जाएगी ताकि इनोवेशन के क्षेत्र में काम करने वाले लोगों के विचारों को मूल्यवान आईटी संपदा में परिवर्तित किया जा सके। इसके अलावा हमारे देश के मानव संसाधन को भी अधिक से अधिक उत्पादक बनाए जाने की जरूरत है ताकि देश में स्वदेशी बौद्धिक संपदा का विकास हो सके तभी भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत बनेगी और निकट भविष्य में 5 ट्रिलियन अमरीकी डालर के लक्ष्य को हासिल किया जा सकेगा बल्कि 10 ट्रिलियन अमरीकी डालर से भी आगे जा जा सकेगा।

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