ओम्कारेश्वर-मृत आत्मा की शांति एवं सुख समृद्धि के लिए तटों पर तर्पण का कार्य जारी-आंचलिक ख़बरें-ललित दुबे

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मृत आत्मा की शांति एवं सुख समृद्धि को लेकर श्राद्ध पक्ष मे 16 दिनों तक पवित्र तटों पर तर्पण का कार्य जारी

नर्मदा एवं कावेरी नदी के तट पर गया शिला पर 16 दिनो श्राद्ध में पित्तरों का तर्पण करने से गयाजी में कीये तर्पण करने का फल गया शिला मे प्राप्त होता है। इसी को लेकर दूर दूर से श्रद्धालुगण तर्पण के लिये पहुचते है। ज्योतिर्लिंग भगवान ओकारेश्वर के निकट ग्राम पंचायत सैलानी के अंतर्गत. जैन तीर्थ सिद्धवरकूट के समीप कावेरी नदी के तट पर पहाड़ो के बीच स्थित है। प्रकृति की सुंदर वादियों के बीच पहाड़ पर स्थित पांडव कालीन जीर्ण शीर्ण शिव मंदिर सहित खण्डर में तब्दील खण्डित अनेक मूर्तियो के साथ स्वंयभू प्रकट हुई गयाशिला मौजूद है

पण्डित धर्मेन्द्र पाठक ने बताया कि यह उल्लेखित प्राचीन कथा व स्कंद पुराण के अनुसार द्वापर युग मे माँ नर्मदा की भक्ति में लीन रहकर निरन्तर परिक्रमा करने वाले मार्कण्डेय ऋषि ने इसी स्थान पर चतुर्मास किया था।
इसी दौरान मार्कण्डेय ऋषि ने 16 श्राद्ध में गयाजी मे गयाशिला पर अपने पूर्वजों के पिंडदान व तर्पण के लिये इच्छा जताते हुए भगवान श्रीहरि विष्णु का ध्यान व तप किया। विष्णु भक्त होने के कारण श्री हरि विष्णु जी ने प्रकट होकर ब्राह्मण का वेश धारण कर स्वयम्भू प्रकट हुई गयाशिला पर तर्पण करवाया था। जिससे मार्कण्डेय ऋषि को गयाजी स्थित गयाशिला का फल प्राप्त हुआ था। पितरों की शांति के लिए तर्पण एवं नारायण नागबली का कर्म किया जा रहा है
ऐसी किदवंती है। जो श्रद्धालु यहा पर तर्पण करता है उसे भी गयाजी का फल प्राप्त होता है।
गयाजी में जो श्रापित नदी फाल्गु है जो विलुप्त हैं उसी प्रकार यहा पर भी एरण्य नदी है जो विलुप्त होकर कावेरी में मिल रही है।
इसी प्रकार नर्मदा के तट ओकारेश्वर में भी अपने पितरों की शांति एवं उनके आशीर्वाद के लिए प्रतिदिन विभिन्न विभिन्न सामग्रियों से तर्पण का कर्म पंडित रूपमाग्त शुक्ला के आचरण किया जा रहा है.

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