राजेंद्र राठौर
झाबुआ, स्थानीय पुलिस चौकी सारंगी में पेसा कानून के अंतर्गत गठित ग्राम सभा शांति एवं विवाद निवारण समितियों का प्रशिक्षण सम्पन्न हुआ। जिसमें पेसा ब्लॉक समन्वयक अधिकारी कैलाश निनामा ने शांति एवं विवाद निवारण समितियों को समझाते हुए बताया की हमारे क्षेत्र में सरकार ने जनजाति समाज को सशक्त बनाने के लिए पेसा कानून लागू किया गया है, उसके बाद भी हम लोग थानों पर क्यों आते हैं? हम लोग कोर्ट कचहरी के चक्कर क्यों लगाते हैं? जबकि पेसा कानून ये कहता है कि पारंपरिक रूप से हमारी ग्राम सभा ही पुलिस थाना हैं और हमारी ग्राम सभा ही न्यायालय हैं तो फिर हम लोग छोटे छोटे मामले लेकर थानों पर क्यों आते हैं हम लोगों को ऐसे मामले जो गंभीर अपराध की श्रेणी में न आते हो ऐसे मामलों को हमें ग्राम सभा के माध्यम से गांव में ही निपटा लेना चाहिए।
हम लोग छोटे-छोटे मामलों को लेकर थाने पर आते हैं और एफआईआर होने के बाद वो मामला कोर्ट कचहरी तक पहुंच जाता है और वही मामला कितना लम्बा समय ले लेता है उसकी कोई समय सीमा नहीं होती है। जबकि हम लोगों को मामलों में एफआईआर होने के बाद कायमी होने के बाद जेल जाना पड़ता है और जमानत पर आने के बाद कोर्ट कचहरी के चक्कर लगाने पड़ते हैं और अंत में हमें ग्राम सभा के माध्यम से समझौता करना पड़ता है। हम लोग घूम फिरकर लास्ट में ग्राम सभा में जाते हैं तो क्यों न हम पहले ही इन मामलों को लेकर ग्राम में निपटारा कर लें। इसलिए हमारे जनजाति समाज को आर्थिक रूप से भी नुकसान होता है। साथ ही समय भी बर्बाद होता है। इसलिए हमें ऐसे मामलों को शांति एवं विवाद निवारण समितियों के माध्यम से ग्राम में ही सर्वसहमति से निपटारा करना चाहिए।
इसके साथ ही कैलाश निनामा ने पेसा के सभी प्रावधानों को विस्तार से बताया ताकि पेसा कानून को लेकर लोगों में किसी प्रकार से कोई अभाव न रहें।इस अवसर पर सारंगी चौकी प्रभारी रामसिंह चौहान एवं अन्य पुलिस कर्मी, साथ ही पेसा मोबलाइजर राकेश गामड़, मनोज पड़ियार, विजय वसुनिया, मुकेश मावी, राकेश चरपोटा, गोविंद डामर, अजय कटारा, सोवनी सोलंकी एवं चौकी के अंतर्गत आने वाले गांवों की शांति समितियों के सभी सदस्य उपस्थित रहे।