उम्रकैद का दोषी रेपिस्ट जेल से बाहर, हाईकोर्ट की बेल ने हिला दिया देश

Anchal Sharma
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उम्रकैद का दोषी रेपिस्ट जेल से बाहर, हाईकोर्ट की बेल ने हिला दिया देश

डिजिटल डेस्क | आंचलिक खबरे |

जिस उन्नाव रेप केस ने पूरे देश को झकझोर दिया था, आज उसी मामले का दोषी उम्रकैद की सजा काट रहा पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर जेल से बाहर आ गया है। दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा सशर्त जमानत दिए जाने के बाद यह सवाल गहराने लगा है कि क्या अब ताकतवरों के लिए कानून अलग है और क्या इंसाफ भी चुनाव देखकर मिलेगा।

हाईकोर्ट का फैसला और जमानत की शर्तें

दिल्ली हाईकोर्ट की बेंच—जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद और जस्टिस हरीश वैद्यनाथन शंकर—ने सेंगर की सजा को अपील पर अंतिम सुनवाई तक सस्पेंड करते हुए 15 लाख रुपये के निजी मुचलके पर जमानत दी है। कोर्ट ने चार शर्तें रखी हैं—आरोपी पीड़िता से 5 किलोमीटर दूर रहेगा, हर सोमवार पुलिस को रिपोर्ट करेगा, पासपोर्ट जमा करेगा और किसी भी शर्त के उल्लंघन पर जमानत रद्द कर दी जाएगी।

पीड़िता का विरोध और इंडिया गेट पर धरना

फैसले से आहत पीड़िता, उसकी मां और सामाजिक कार्यकर्ता योगिता भयाना मंगलवार शाम इंडिया गेट के सामने धरने पर बैठ गईं। देर रात पुलिस मौके पर पहुंची, हटने को कहा गया और बहस के बाद तीनों को जबरन वहां से हटा दिया गया। महिला सिपाहियों ने पीड़िता और उसकी मां को उठाकर अपने साथ ले गईं।

“अब हमें मार देंगे” — पीड़िता का दर्द

पीड़िता ने भावुक होकर कहा कि उसे आत्महत्या का ख्याल आया है। उसके दो मासूम बच्चे हैं और अगर उसे कुछ हो गया तो उसके परिवार को कौन बचाएगा। उसका आरोप है कि पहले उसके चाचा की बेल खारिज हुई, फिर पूरे परिवार और पैरोकारों की सुरक्षा हटा दी गई और अब आरोपी उसके घर से सिर्फ 5 किलोमीटर दूर रहेगा, जिससे जान का खतरा बढ़ गया है।

घटनाओं की भयावह कड़ी

एक्टिविस्ट योगिता भयाना ने सवाल उठाया कि क्या न्याय मांगना अब गुनाह हो गया है। उन्होंने बताया कि एक बेटी के साथ रेप हुआ, उसके पिता की कस्टडी में मौत हुई, बुआ, मौसी और वकील की हत्या हुई, खुद पीड़िता का एक्सीडेंट कराया गया, 120 से ज्यादा टांके लगे, 7 हड्डियां टूटीं और 6 महीने अस्पताल में रहना पड़ा—फिर भी इंसाफ अधूरा है।

निर्भया की मां ने भी उठाए सवाल

निर्भया की मां आशा देवी ने कहा कि बलात्कारियों को किसी भी हाल में जमानत नहीं मिलनी चाहिए। 500 किलोमीटर दूर हों या 5 किलोमीटर, खतरा बना रहता है। ऐसे फैसले न्याय व्यवस्था पर सवाल खड़े करते हैं।

उन्नाव केस का पूरा घटनाक्रम

इस केस की शुरुआत 2017 में हुई थी, जब 17 वर्षीय नाबालिग लड़की का अपहरण कर गैंगरेप किया गया। मामले की जांच सीबीआई ने की और सुप्रीम कोर्ट ने केस को उत्तर प्रदेश से दिल्ली ट्रांसफर किया। 20 दिसंबर 2019 को तीस हजारी कोर्ट ने कुलदीप सिंह सेंगर को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद और मृत्यु तक जेल में रखने का आदेश दिया था, साथ ही 25 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया था।

राजनीतिक पृष्ठभूमि और नए सवाल

कुलदीप सिंह सेंगर बसपा, सपा और बाद में भाजपा में रह चुका है। वह चार बार विधायक रहा और कभी चुनाव नहीं हारा। अब उसकी रिहाई के बाद यह सवाल उठ रहे हैं कि क्या आने वाले चुनावों के चलते यह फैसला आया है और क्या पीड़िता की जान आज भी सुरक्षित है।

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