खंडेहा ग्राम पंचायत के आरखन पुरवा में पेयजल पड़ताल-आँचलिक ख़बरें-प्रमोद मिश्रा

News Desk
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उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जिले के मऊ ब्लाक अंतर्गत ग्राम पंचायत खंडेहा के मजरा आरखन पुरवा की 9 महिलाएंने जिला अधिकारी चित्रकूट के यहां जाकर पेयजल संकट की बात मीडिया से बताई थी। इसी के तहत इन्हीं के पुरवा में पड़ताल करने पर यह पुरवा 3 भाग में बटा हुआ है जिसमें छह या सात घर पर एक-एक हैंड पर न लगे हैं और रोड साइड का पांच घर के जो डेरा हैं जिस पर एक हैंडपंप लगा हुआ है जो नियम से सही है और यह सरेआम अपने आप खेत जो गांव के से दूर जाकर डेरा बना लिया है और विपच्छ के भड़काने पर प्रधान के मान को ठेस पहुंचाते हैं .

आरखन पुरवा के ही संतोष आरख के घर के सामने पक्का कुआं है जिसमें पानी है जगत ऊंची है और उनकी पत्नी गौरी देवी का कहना है कि इस साल बरसात में घर गिर गए हैं हम कहां रहे यह बात यह बात से साबित होता है कि इस 18 परिवार के आंरखों ने गांव छोड़ कर के अपने अपने खेत में डेरा डाल लिया था अब उन्ही लोगों के डेरा को मजरा बना कर विकास किया जा रहा है । जहां पर 6-7 घर पर एक हैण्ड पम्प होता है डेरा के सभी लोगों के पास पानी की व्यवस्था है और वर्तमान ग्राम प्रधानपति ने अरखन पुरवा के बड़कू आरख, सन्तोष आरख और अन्य लोगों को शादी विवाह बीमारी और त्योहारों में मदद भी की है लेकिन गांव के ही कुछ विपक्षी लोगों ने इन महिलाओं को बहला कर प्रधान के खिलाफ भड़काते हैं । प्रधान जी का कहना है कि जो भी उचित योजनाएं आएंगी जो पात्र होंगे मैं उनको दूंगा शायद इनका 6 हजार का शौचालय का पैसा इनको खाते में दे दिया गया है और मैं दूसरी किस्त भी भेज रहा हूं लेकिन संभवतः शायद उन्होंने अपना शौचालय निर्माण नहीं करवाया है यह सरकारी योजनाओं का लेखा-जोखा मात्र अपने सुख के लिए जानना चाहते हैं कि आवास का पैसा दो शौचालय का दो यह लोग पैसा सब खर्च कर डालते हैं और इनको अभाव बना ही रहता है ग्राम पंचायत सचिव दिनेश सिंह ने कहा कि मैं जाकर के मौका मुआयना किया हूं तो सब कुछ सही है। शौचालय अरखन पुरवा के सभी लोग बनवाएं क्योंकि वो खेत में अपना घर बनवाए हैं इसलिए वह लोग खेत में ही जाते हैं संडास के लिए उनको शौचालय की जरूरत ही नहीं है पैसे की जरूरत पड़ती है यह बात सच है लेकिन ग्रामीणों की समस्याओं के लिए ही हम बैठे हैं हमारे पास सचिवालय आएं और कागज पत्र दे लिस्ट में नाम डलवाए जब हमारी बैठक होती है तब तो गांव के किसी आदमी को समय नहीं होता है कि आकर के बैठक में शामिल हो और क्या कार्य योजना बन रही है देखे समझे और आदमी ना जानते हुए भी आरोप लगाता रहता है और इन के मजरा में शिक्षा के अभाव के कारण अधिकारी और मीडिया को यह लोग उलाहना देते हैं और गलत बातों भी भी बोल देते हैं।

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