योगी आदित्यनाथ ने फिर जताया सियासी दम, अमित शाह को दिया साफ संदेश—आदेश नहीं, जनादेश से चलता है नेतृत्व

Anchal Sharma
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yogi\ amit shah

सेवा विस्तार न मिलने पर अपने भरोसेमंद अफसरों को अहम पद, शिक्षा सेवा आयोग का गठन कर प्रशांत कुमार को सौंपी बड़ी जिम्मेदारी

डिजिटल डेस्क | आंचलिक ख़बरें |

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि वे केवल आदेशों का पालन करने वाले मुख्यमंत्री नहीं हैं, बल्कि जनादेश से शासन चलाने वाले नेता हैं। हालिया घटनाक्रम में योगी आदित्यनाथ ने केंद्रीय नेतृत्व, विशेष रूप से गृहमंत्री अमित शाह को यह संकेत दे दिया है कि अगर उनकी बात नहीं मानी गई, तो वे अपने तरीके से नए रास्ते बनाने में भी पीछे नहीं हटेंगे।

अविनाश अवस्थी को सलाहकार बनाकर बरकरार रखी ताकत

योगी आदित्यनाथ अविनाश अवस्थी को सेवा विस्तार दिलाना चाहते थे, लेकिन केंद्र सरकार से स्वीकृति नहीं मिली। इसके बावजूद योगी ने अविनाश अवस्थी को अपना सलाहकार नियुक्त कर दिया, जिससे उनकी सुविधाएं और प्रशासनिक प्रभाव दोनों बने रहे।

मनोज कुमार सिंह को मिला ताकतवर ओहदा

मुख्य सचिव पद से रिटायर होने के बाद मनोज कुमार सिंह को सेवा विस्तार दिलाने की योगी की कोशिशें भी केंद्र स्तर पर सफल नहीं हो सकीं। इसके बाद योगी आदित्यनाथ ने मनोज कुमार सिंह को राज्य योजना आयोग जैसे प्रभावशाली संस्थान की जिम्मेदारी सौंप दी, जिससे उनका कद बरकरार रहा।

प्रशांत कुमार के लिए भी बनाई नई राह

इसके बाद बारी आई योगी के बेहद भरोसेमंद अधिकारी और लंबे समय तक प्रदेश के एडीजी लॉ एंड ऑर्डर तथा डीजीपी रहे प्रशांत कुमार की। योगी चाहते थे कि उन्हें भी सेवा विस्तार मिले, लेकिन केंद्र सरकार ने इस पर सहमति नहीं दी। इसके बावजूद योगी आदित्यनाथ ने पीछे हटने के बजाय एक नई राजनीतिक और प्रशासनिक रणनीति अपनाई।

शिक्षा सेवा आयोग का गठन, नियमों में संशोधन

उच्च शिक्षा सेवा आयोग और माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड को मिलाकर एक अत्यंत शक्तिशाली संस्था उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा आयोग का गठन किया गया। इसके नियमों में आवश्यक संशोधन कर पूर्व डीजीपी प्रशांत कुमार के लिए एक प्रभावशाली पद तैयार किया गया।

प्रशांत कुमार बने शिक्षा सेवा आयोग के अध्यक्ष

योगी आदित्यनाथ ने अपने खास सिपहसालार प्रशांत कुमार को उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा आयोग का ताकतवर अध्यक्ष नियुक्त कर दिया। इस फैसले के जरिए उन्होंने यह साफ संदेश दे दिया कि दबाव की राजनीति के सामने झुकने के बजाय वे और अधिक प्रभाव के साथ शासन चलाना जानते हैं।

लंबी राजनीतिक पारी के संकेत

इन फैसलों से यह भी स्पष्ट होता है कि योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश में लंबी राजनीतिक पारी खेलने की तैयारी में हैं। उन्होंने एक बार फिर यह जता दिया है कि अगर उनकी रणनीतियों में बाधा डाली जाएगी, तो वे नए संस्थागत और प्रशासनिक ढांचे खड़े कर अपने रास्ते खुद तय

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