धर्मनगरी चित्रकूट में भव्य आयोजन, वैदिक मंत्रोच्चार के बीच संपन्न हुआ सामूहिक विवाह
डिजिटल डेस्क | आंचलिक ख़बरें
धर्मनगरी चित्रकूट के राष्ट्रीय रामायण मेला परिसर, सीतापुर में सोमवार को समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के अंतर्गत 308 जोड़ों का सामूहिक विवाह संपन्न कराया गया। वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक रीति-रिवाजों के बीच आयोजित इस कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति रही।
नवविवाहितों को प्रमाण पत्र व गृहस्थी का सामान भेंट
कार्यक्रम के दौरान सभी नवविवाहित जोड़ों को विवाह प्रमाण पत्र के साथ-साथ गृहस्थी से जुड़ा आवश्यक सामान भी प्रदान किया गया। बड़ी संख्या में वर-वधू के परिजन, स्थानीय नागरिक और विभागीय अधिकारी इस आयोजन के साक्षी बने।
योजना को बताया गया गरीब परिवारों के लिए वरदान
मंच से वक्ताओं ने मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना की सराहना करते हुए इसे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए एक सशक्त सहारा बताया। अधिकारियों ने कहा कि योजना का उद्देश्य गरीब परिवारों की बेटियों के विवाह में आर्थिक सहयोग प्रदान करना है, ताकि वे सामाजिक सम्मान के साथ अपने वैवाहिक जीवन की शुरुआत कर सकें।
निगरानी व्यवस्था पर उठे सवाल
हालांकि, कार्यक्रम के बाद योजना की निगरानी व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। स्थानीय लोगों और सूत्रों के अनुसार, सामूहिक विवाह संपन्न होने के बाद यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी किस अधिकारी की है कि नवविवाहिता वास्तव में ससुराल गई या नहीं—यह स्पष्ट नहीं है।
योजना के दुरुपयोग के आरोप
सूत्रों का दावा है कि सरकारी लाभ प्राप्त करने के उद्देश्य से कुछ मामलों में योजना के तहत विवाह कराने के बाद लड़कियों की दोबारा उसी युवक से पारंपरिक तरीके से शादी कराई जाती है। यदि ऐसा हो रहा है, तो यह न केवल योजना की मूल भावना के विपरीत है, बल्कि मुख्यमंत्री के निर्देशों की भी अवहेलना मानी जाएगी।
प्रशासनिक तंत्र पर खड़े हुए प्रश्न
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि ऐसे मामलों की जानकारी पहले से मिलती रही है, तो अब तक इसकी जांच और रोकथाम क्यों नहीं की गई। क्या सामूहिक विवाह के बाद नवविवाहित जोड़ों के जीवन की कोई विभागीय मॉनिटरिंग व्यवस्था है, या फिर केवल विवाह संपन्न कराकर जिम्मेदारी पूरी मान ली जाती है?
आगे क्या करेगा प्रशासन?
इस पूरे मामले ने प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखने वाली बात यह होगी कि समाज कल्याण विभाग और जिला प्रशासन इस दिशा में क्या ठोस कदम उठाता है और क्या भविष्य में योजना के दुरुपयोग को रोकने के लिए कोई प्रभावी निगरानी तंत्र विकसित किया जाएगा।

