भिवंडी। भिवंडी के कल्याण रोड स्थित आसबीबी मस्जिद से खदान मार्ग, फुले नगर और मानसरोवर तक फैली सड़कें इन दिनों नागरिकों के लिए मुसीबत बन गई हैं। भारी बारिश के बाद यह संपर्क मार्ग गड्ढों और कीचड़ का ऐसा दलदल बन गया है कि पैदल चलना भी दूभर हो गया है। स्थानीय लोगों ने मनपा प्रशासक, आयुक्त अनमोल सागर और शहर अभियंता जमील पटेल से तत्काल इस ओर ध्यान देने की गुहार लगाई है।
गड्ढों और कीचड़ से अटे पड़े हैं रास्ते
मुख्य सड़क पर गड्ढों को भरने के लिए डाली गई मिट्टी बारिश में बहकर पूरे रास्ते पर फैल गई है, जिससे पूरा इलाका कीचड़ से पट गया है। प्राइम अस्पताल, रुंगटा साइजिंग, सदगुरू मिल स्टोर और हनुमान टेकडी से फुले नगर及 मानसरोवर कॉम्प्लेक्स तक का पूरा रास्ता इन हालात से जूझ रहा है। मनपा के एसटीपी प्लांट के सामने तो सड़क पूरी तरह से बह चुकी है, और गड्ढे इतने गहरे हैं कि लोगों के फिसलने और गिरने की घटनाएं आम हो गई हैं।
प्रशासनिक उपेक्षा के शिकार नागरिक
नागरिकों का आरोप है कि मनपा आयुक्त पहले इसी रास्ते से अपने कार्यालय आया-जाया करते थे, लेकिन अब वे वराला देवी मंदिर चौक से होकर धामनकर नाका के रास्ते मुख्यालय पहुँचते हैं, ताकि इस कीचड़ और गड्ढों से बच सकें। ऐसे में आम नागरिकों की परेशानी पर ध्यान न दिया जाना चिंता का विषय बना हुआ है।
विधायक पर लापरवाही के आरोप
यह क्षेत्र सपा विधायक रईस शेख के विधानसभा क्षेत्र में आता है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि विधायक महोदय मुस्लिम बहुल इलाकों जैसे शांतिनगर आदि के विकास पर तो ध्यान दे रहे हैं, लेकिन इस मुख्य मार्ग की स्थिति सुधारने की ओर कोई ध्यान नहीं दे रहे। नागरिकों से टैक्स वसूल करने वाली भिवंडी मनपा के पास सड़क निर्माण के लिए फंड का अभाव है, और विधायक द्वारा भी इस ओर कोई ठोस पहल नहीं की जा रही।
नागरिकों की पीड़ा
जबकि MMRDA और PWD विभाग शहर के अन्य हिस्सों में सड़क निर्माण का काम कर रहे हैं, इस मुख्य मार्ग की उपेक्षा जारी है। हजारों नागरिक प्रतिदिन इस रास्ते का उपयोग करते हैं और वर्षों से इस दुर्गम सड़क की वजह से दिक्कतें झेल रहे हैं। उनका मानना है कि जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों की लापरवाही के कारण ही यह हालात बने हुए हैं।
भिवंडी के इस मुख्य मार्ग की स्थिति न केवन नागरिकों के लिए चुनौतीपूर्ण बनी हुई है, बल्कि यह सवाल भी खड़ा करती है कि क्या विकास की बातें केवल दिखावे तक सीमित हैं? नागरिकों की मूलभूत सुविधाओं के प्रति संवेदनशीलता और जवाबदेही की दरकार है, ताकि ऐसे हालातों से निपटा जा सके और आम जनता को राहत मिल सके।
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