14,450 करोड़ खर्च, फिर भी युवाओं को न नौकरी न पैसा! CAG रिपोर्ट ने PMKVY की पोल खोल दी

Anchal Sharma
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फर्जी बैंक अकाउंट, कागज़ी ट्रेनिंग और रिपोर्टों में रोजगार—प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना पर गंभीर सवाल

अगर यह कहा जाए कि देश में युवाओं के स्किल डेवलपमेंट के नाम पर 14,450 करोड़ रुपये खर्च हुए, लेकिन न पैसा सही जगह पहुंचा, न असली ट्रेनिंग हुई और न ही स्थायी रोजगार मिला—तो यह चौंकाने वाला जरूर लगेगा। लेकिन नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की हालिया रिपोर्ट ने प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY) को लेकर यही हकीकत सामने रख दी है। इस रिपोर्ट ने पूरे सिस्टम को कटघरे में खड़ा कर दिया है।

2015 में बड़ी उम्मीदों के साथ शुरू हुई थी PMKVY

साल 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना की शुरुआत युवाओं को हुनरमंद बनाकर रोजगार योग्य बनाने के उद्देश्य से की थी। इसे उस समय एक “गेमचेंजर” योजना बताया गया। 2015 से 2022 तक तीन चरणों में लागू इस योजना के जरिए लाखों युवाओं को फ्री ट्रेनिंग और सर्टिफिकेट देने का दावा किया गया, लेकिन अब CAG रिपोर्ट ने इसकी जमीनी सच्चाई उजागर कर दी है।

क्या है PMKVY योजना

प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के तहत युवाओं को विभिन्न सेक्टर्स में मुफ्त प्रशिक्षण दिया जाता है, ताकि वे नौकरी पा सकें या स्वरोजगार शुरू कर सकें। सरकार ट्रेनिंग का पूरा खर्च उठाती है और कोर्स पूरा होने पर प्रमाणपत्र भी देती है। साथ ही लाभार्थियों को रिवॉर्ड मनी, यात्रा और रहने-खाने का खर्च देने का प्रावधान भी है।

96 लाख लाभार्थी, लेकिन बैंक अकाउंट ही फर्जी

CAG रिपोर्ट के अनुसार, PMKVY के दूसरे और तीसरे चरण में करीब 96 लाख युवाओं को ट्रेनिंग और सर्टिफिकेट दिए गए। लेकिन इनमें से 94 फीसदी से ज्यादा लाभार्थियों के बैंक अकाउंट या तो खाली पाए गए या उनमें “निल”, “एनए”, “जीरो” जैसे शब्द दर्ज थे। कई मामलों में बैंक अकाउंट नंबर की जगह 11111111 या 123456 जैसे नंबर दर्ज मिले। चौंकाने वाली बात यह रही कि करीब 12 हजार बैंक अकाउंट 52 हजार से ज्यादा लाभार्थियों के नाम पर दर्ज थे, जिससे यह संदेह और गहरा हो गया कि लाभार्थी असली थे या सिर्फ कागज़ों में।

34 लाख युवाओं का भुगतान आज भी अटका

इन गड़बड़ियों का सीधा असर भुगतान प्रक्रिया पर पड़ा। PMKVY के तहत प्रमाणित उम्मीदवारों को मिलने वाली रिवॉर्ड मनी और अन्य भुगतान में भारी अनियमितताएं सामने आईं। रिपोर्ट के अनुसार 34 लाख से अधिक युवाओं का भुगतान आज तक लंबित है। डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) केवल 18 फीसदी मामलों में ही सफल हो पाया, जो योजना की कमजोर निगरानी और सिस्टम फेलियर को दर्शाता है।

कागज़ों में ट्रेनिंग, अजीब प्लेसमेंट दावे

CAG रिपोर्ट में ऐसे उदाहरण भी सामने आए हैं जो व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। एक ट्रेनिंग एजेंसी ने दावा किया कि उसने 30 हजार फिटनेस ट्रेनर तैयार किए, जो केवल 33 जिम में काम कर रहे हैं। यानी एक जिम में औसतन 910 ट्रेनर—जो व्यावहारिक रूप से असंभव है। ऐसे ही अविश्वसनीय आंकड़ों के जरिए योजना में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की गई।

योग्यता जांच के बिना सर्टिफिकेशन

रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ कि लाखों मामलों में उम्मीदवारों की उम्र, शिक्षा और कार्य अनुभव की जांच तक नहीं की गई। 18 साल से कम उम्र के 40 हजार से अधिक लोगों को टेलर के रूप में सर्टिफाइड कर दिया गया, जबकि कृषि से जुड़े कोर्स में न्यूनतम उम्र से कम 52 हजार उम्मीदवार पास कर दिए गए।

रोजगार का दावा, हकीकत कमजोर

PMKVY का सबसे बड़ा उद्देश्य रोजगार था, लेकिन CAG रिपोर्ट के अनुसार केवल 41 फीसदी लाभार्थियों को ही किसी तरह का प्लेसमेंट मिला। कई सेक्टर्स में तो प्लेसमेंट दर शून्य रही। यानी ट्रेनिंग और सर्टिफिकेट तो मिले, लेकिन नौकरी जमीनी स्तर पर नदारद रही।

अब सबसे बड़ा सवाल

प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना युवाओं के भविष्य को मजबूत करने के इरादे से शुरू की गई थी, लेकिन CAG रिपोर्ट ने साफ कर दिया है कि यह योजना लापरवाही, फर्जीवाड़े और कमजोर निगरानी की भेंट चढ़ गई। अब सवाल यह है कि क्या केंद्र सरकार इन गंभीर खुलासों से सबक लेकर ठोस सुधार करेगी, या फिर यह रिपोर्ट भी बाकी रिपोर्टों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगी।

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