Electronic Screen की लत बच्चों के लिए क्यों बनती जा रही है Dangerous?

Aanchalik khabre
10 Min Read
Digital Electronic Screen

Electronic Screen का अत्यधिक उपयोग करते हैं, उनके मानसिक विकास और कल्याण में समस्याएं होती हैं

जीवन कितना सरल हो जाता है जब सब कुछ एक ही छोटे से बॉक्स में समाहित होता है जिसे आप जब चाहें तब खोल सकते हैं और अंदर की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। आपका यह मानना सही है कि हम केवल Mobile Phone  पर चर्चा कर रहे हैं। यह बताने की जरूरत नहीं है कि आधुनिक समय में मोबाइल फोन का उपयोग सर्वव्यापी कैसे बढ़ गया है।Digital Electronic

हमने अपने घर में उन्हें कई बार बताया होगा कि उनका दो साल का बच्चा इतना बुद्धिमान है कि वह अपने फोन पर Video Games खेलता है। वैकल्पिक रूप से, उनका बच्चा अपने फ़ोन से नज़र हटाए बिना खाना खाता है। माता-पिता अपने बच्चे की फ़ोन संबंधी दक्षता पर गर्व करते हैं। हालाँकि, स्वतंत्र माता-पिता के लिए यह समझना भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि नियमित फोन का उपयोग उनके बच्चों को मानसिक रूप से परेशान करने के अलावा उनकी मानसिक बीमारी में भी योगदान दे रहा है।

छोटी उम्र के बच्चों के फोन के इस्तेमाल का आंकड़ा चौंकाने वाला सामने आया है. इस आंकड़े के अनुसार हर डेढ़ साल का बच्चा 5 घंटे तक मोबाइल में खोया रहता है. इसके अलावा Sapien lab की एक ताजा रिपोर्ट सामने आई है. जिसमें जेन Z यानी 18-24 साल की उम्र वाले 27,969 लोगों के डेटा का इस्तेमाल किया गया है.

इस रिपोर्ट में बचपन से Electronic Screen का इस्तेमाल करने के वाले बच्चों के वर्तमान मानसिक स्वास्थ्य के बीच संबंधों के बारे में पता लगाने की कोशिश की गई है. रिपोर्ट के अनुसार जिन लोगों ने बहुत छोटी उम्र से मोबाइल पर बहुत ज्यादा समय बिताना शुरू कर दिया था, उनमें मानसिक विकास और मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित दिक्कतें ज्यादा देखी गई हैं.

इसी रिपोर्ट में बताया गया कि जिन पुरुषों को 6 साल की उम्र में पहली बार स्मार्टफोन मिला था उनकी तुलना में 18 साल की उम्र में फोन का इस्तेमाल करने वालों में मानसिक विकारों के विकास का खतरा 6 प्रतिशत ज्यादा है. वहीं महिलाओं की बात करें तो उनमें यह जोखिम लगभग 20 प्रतिशत अधिक ज्यादा था.

Digital Eye Strain या Computer Vision Syndrome जैसी बीमारियां दे रहा मोबाइल

ज्यादा मोबाइल फोन का इस्तेमाल करना लोगों को डिजिटल आई स्ट्रेन या Computer विजन सिंड्रोम जैसी बीमारी दे रहा है. कोरोना महामारी के कारण हुए लॉकडाउन ने भारत सहित दुनिया के सभी देशों में Digital Electronic Screen उपकरणों का इस्तेमाल बढ़ा दिया है. घर में महीनों तक बंद रहने के कारण अधिकांश लोगों को एक दूसरे से बातचीत करने और अपनी नौकरी की जिम्मेदारियों को जारी रखने के लिए Digital उपकरणों का सहारा लेना पड़ा.

Digital Eye Strain
Digital Eye Strain

अब भले ही कोरोना खत्म हो गया हो लेकिन Online Education Services और Zoom Google meet जैसे Video कॉन्फ्रेंसिंग प्लेटफार्मों का इस्तेमाल लगातार बढ़ता ही जा रहा है. कामकाजी व्यस्क के अलावा बच्चे भी पढ़ाई करने के लिए इन प्लेटफॉर्म का उपयोग कर रहे हैं.

Computer Vision Syndrome
Computer Vision Syndrome

इसके अलावा, बच्चों द्वारा Social Media पर बिताया जाने वाला समय भी काफी बढ़ गया है. जो कि युवाओं में Digital Eye Strain या Computer Vision Syndrome  का कारण बन रहा है.

Digital Stain के कारण

आंखों से लगातार आंसू आना
दृष्टि कमजोर होना
सिरदर्द
आंखों का लाल होना
आंखों का सूखापन
आंखों में बेचैनी
आंखों में खुजली
कंधे का दर्द
आंखों में थकान

कितने साल की उम्र तक बच्चों को रखना चाहिए Phone or Digital Electronic Screen से दूर

आई स्पेशलिस्ट Dr. Manu Taneja ने एबीपी से बातचीत में बताया कि कम से कम दो साल तक के बच्चे को तो मोबाइल से ज्यादा से ज्यादा दूर रखने की कोशिश करनी चाहिए. उन्होंने कहा कि अगर बच्चा Mobile लेने की या Games खेलने की जिद करता है तो माता-पिता को उन्हें अलग अलग Activity के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए. बच्चों के मन में मोबाइल की जगह Books के लिए, पार्क में घूमने, दोस्तों के साथ खेलने के लिए जगह बनाना बेहद जरूरी है.

Mobile phone मानसिक तौर पर कैसे कर रहा असर

मनोवैज्ञानिक Manisha Farmania ने एबीपी से बातचीत करते हुए कहा कि कम उम्र के बच्चों में मोबाइल की लत के बहुत सारे खतरे सामने आए हैं. इनमें वर्चुअल ऑटिज्म का नाम सबसे प्रमुखता से लिया जा रहा है. कुछ दिन पहले ही एक रिपोर्ट आई थी जिसके अनुसार दुनिया भर में बच्चे Virtual Autism का तेजी से शिकार हो रहे हैं.

मनोवैज्ञानिक ने आगे कहा क्योंकि बच्चों का ज्यादातर वक्त Mobile या TV में बीत रहा है इसलिए वह आम जिंदगी में लोगों के बात को समझने में दिक्कत महसूस करने लगते हैं. इसका नकारात्मक प्रभाव यह होता है कि ऐसे बच्चों का Speech Development नहीं हो पाता. ऐसे में बच्चे दूसरे व्यक्ति के सामने या बातचीत में सहज नहीं हो पाते हैं और उनका सामाजिक दायरा कमजोर होने लगता है.

Virtual Autism से बच्चों को कैसे बचाया जाए

Right to Play Initiative के Director और The Shriram Millennium School में Physical Education के Teacher जावेद अख्तर ने एबीपी से बात करते हुए कहा कि अगर बच्चों का शेड्यूल सही से बनाया जाता है तो उन्हें Virtual Autism का शिकार होने से बचाया जा सकता है. इसके लिए बच्चों को फोन या मोबाइल से दूर करना होगा और Physical Activity, खेल और दूसरी एक्टिविटीज में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए. ऐसा करने से बच्चे न सिर्फ गैजेट पर कम निर्भरता को कम करेंगे बल्कि ज्यादा लोगों से मिलने जुलने पर उसका सामाजिक दायरा भी बढ़ेगा. उन्होंने कहा कि बच्चों का स्क्रीन टाइम कम करने के लिए उनके दिन भर के शेड्यूल इस तरह बनाया जाया जाना चाहिए कि वो पूरा दिन व्यस्त रहे.

डिप्रेशन तक के हो रहे हैं शिकार

University of California में बाल और किशोर मनोचिकित्सा विभाग के प्रमुख बेंजामिन मैक्सवेल ने एक रिपोर्ट में कहा कि, हमारे पास ज्यादातर ऐसे किशोर आ रहे हैं, जो छोटी उम्र से ही Digital Electronic screen का इस्तेमाल कर रहे हैं और आज के तारीख में वह मानसिक स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं से परेशान हैं. गंभीर साइबर बुलिंग से लेकर डिप्रेशन तक के मामले किशोरों की क्वालिटी ऑफ लाइफ खराब कर रहे हैं.

उन्होंने कहा कि एक दूसरे से मिलते जुलते रहना और Social Connection हर किसी के लिए आवश्यक है, मोबाइल फोन्स ने इसे खत्म सा कर दिया है. ऐसी आदत बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए अच्छी नहीं है. माता-पिता को अगर लगता है कि उनका बच्चा कम उम्र में ही आपसे बेहतर मोबाइल चला रहा है, और इस बात पर उन्हें गर्व भी हो रहा है तो सावधान हो जाइए यह एडवांस होने का नहीं बीमारी का संकेतक है.

दिन भर में कितना समय Digital Electronic Screen को देना Dangerous नहीं है?

इस सवाल के जवाब में मनोवैज्ञानिक Manisha Farmania कहती है कि Research और मेरा जो अनुभव है उसके अनुसार बच्चों को दिन भर में 4 घंटे से कम समय तक Mobile, TV और Computer or other Digital Electronic screen का इस्तेमाल करने की अनुमति देनी चाहिए . इसके अलावा माता-पिता को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि बच्चे 20/20/20 नियम का पालन करें. यानी हर 20 मिनट के Digital Electronic screen टाइम के बाद, 20 सेकंड का ब्रेक, इस ब्रेक के दौरान बच्चों को 20 फीट की दूरी पर स्थित किसी वस्तु पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता होती है.

इसके अलावा आंखों के सूखापन, जलन और दर्द को ठीक करने के लिए डॉक्टर द्वारा बताया गया आई ड्रॉप का इस्तेमाल करना चाहिए. आई ड्रॉप न सिर्फ आंखों की नमी बनाए रखने का काम करते है, बल्कि रेडनेस, जलन और पलकों पर होने वाले दर्द से भी बचाता है.

 

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