चित्रकूट उत्तर प्रदेश में नगरी निकाय चुनाव में दल बदल नेता खुद को बता रहे पाक साफ

News Desk
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मंडल ब्यूरो – अश्विनी श्रीवास्तव

– जनता करेगी तय किसने किया जनता के साथ प्रतिघात

चित्रकूट।जिला में नगरी निकाय चुनाव को लेकर चर्चा का माहौल गर्म है एक ओर जहां सपा प्रत्याशी जागेश्वर यादव की लोग तारीफ कर रहे हैं तो वहीं भाजपा प्रत्याशी के कार्यकाल के विकास कार्यो की भी चर्चा बाजार में गरमाई हुई है। लेकिन यह तय कर पाना मुश्किल है कि आखिर अब किसके सिर पर ताज होगा । लेकिन यह बिल्कुल देखने को मिल रहा है कि स्थानीय सरकार में जनता बदलाव चाहती है।

– चाचा को सताया डर तो रूठे भतीजे को भी मनाया

वक्त कब किसको दगा दे यह कह पाना मुश्किल है जो चाचा भतीजे से दूर और भतीजा चाचा से दूर रहकर आपसी सामंजस में फंसे हुए थे और नगरी निकाय में खुद को अच्छे स्थान पर बैठकर लोगों की सेवा करने का सपना कई वर्षों से देख रहे भतीजे सानू गुप्ता ने जब नगरी निकाय चुनाव में अध्यक्ष पद पर चुनाव लड़ने की दावेदारी ठोकी तो अपने भतीजे को मनाने के लिए स्वयं वर्तमान अध्यक्ष नरेंद्र गुप्ता को रूठे भतीजे को मनाना पड़ा। कहीं ना कहीं यह तय था कि चाचा से भतीजे का पलड़ा भारी था और चुनाव में भतीजे की नाराजगी का चाचा को खामियाजा भुगतना पड़ सकता था काफी मनाने के बाद आखिर चाचा की बात भतीजे ने मान ही ली और चुनाव लड़ने से मूड बदल लिया । लेकिन भतीजे के मनाने पर आम लोगों का या यूं कहेंकि जनता का मूड बदल पाना बड़ा मुश्किल है क्योंकि जनता को विकास चाहिए ना कि रिश्ते अबकी बार जनता उसी को अध्यक्ष के रूप में देखना चाहती है जो जनता की करीबी हो और क्षेत्र का विकास कर सके।

सपा से बेवफाई कर भाजपा का थामा दामन वैसे तो चित्रकूट में बड़े-बड़े दिग्गज नेताओं की गिरगिट की तरह रंग बदलने की परंपरा बहुत पहले से चली आ रही है। कभी किसी ने सपा का दामन थामा था तो कभी बसपा का जब जनता ने इन दोनों पार्टियों से हटकर भाजपा का सरकार बनाया तो यही नेता पुनः भाजपा का दामन थाम लिए । ऐसे में यह कहना अनुचित नहीं होगा की राजनैतिक के दहलीज पर कोई किसी का सगा नहीं है जिसका जीता जागता उदाहरण वर्तमान नगर पालिका अध्यक्ष सहित सांसद जैसे तमाम नेताओं पर दल बदलने की मुहर लगी हुई है । वैसे देखा जाए तो दल बदलने वाले इन परंपराओं से जुड़े नेता से अगर किसी की हानि होती है या फिर विश्वास टूटता है तो वह है जनता जिसने इनको अपना सर्वश्रेष्ठ नेता मानते हुए अपनी मतों से बिजयी बनाया। अब ऐसे में उन जनताओं की क्या जिसको अपना अमूल्य मत देकर अपना नेता बनाया आज वही जनता अपने आप को ठगा महसूस कर रही है । अगर इन दलबदल करने वाले जनप्रतिनिधियों की विकास की गाथा की बात करें तो यह किसी से छुपी नहीं है चाहे सड़क निर्माण या नाली जैसी मूलभूत सुविधाओं की बात करें तो उसे देख कर ही समझ में आता है कि दलबदल करने वाले नेता जनता की सोच पर कितने खरे उतरे हैं। अब सवाल यह उठता है कि क्या यहां की जनता ऐसे दलबदल करने वाले जनप्रतिनिधियों के ऊपर कितना भरोसा करती हैं।

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