भारत-जर्मनी संबंध: “सहयोग की अपार संभावनाएं” – जर्मन विदेश मंत्री की जयशंकर से मुलाकात

Aanchalik Khabre
5 Min Read
जर्मनी के विदेश मंत्री के साथ डॉ. जयशंकर

नई दिल्ली में भारतीय विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर और जर्मनी के विदेश मंत्री जोहान डेविड वेडफुल के बीच महत्वपूर्ण बैठक हुई। इस मुलाकात में दोनों नेताओं ने भारत और जर्मनी के बीच सहयोग को नई ऊँचाइयों पर ले जाने की इच्छा जताई। जर्मन मंत्री ने कहा कि दोनों देशों के बीच आर्थिक, सांस्कृतिक और तकनीकी क्षेत्रों में अपार संभावनाएं हैं।

भारत-जर्मनी का मजबूत इतिहास

डॉ. जयशंकर ने बैठक में कहा कि भारत और जर्मनी के बीच एक लंबा और मजबूत इतिहास रहा है। यह साझेदारी 25 सालों से रणनीतिक, 50 सालों से वैज्ञानिक और लगभग 60 सालों से सांस्कृतिक क्षेत्रों में निरंतर फल-फूल रही है। इसके अलावा दोनों देशों के बीच व्यावसायिक संबंध एक शताब्दी से भी अधिक समय से चले आ रहे हैं।

उन्होंने कहा कि यूरोपीय संघ के साथ भारत के संबंधों को मजबूत बनाने और मुक्त व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने में जर्मनी की भूमिका अहम है। वे उम्मीद जताते हैं कि इस बातचीत से दोनों देशों के रिश्ते और बेहतर होंगे।

बंगलूरू में तकनीकी सहयोग का जायजा

जर्मन विदेश मंत्री ने भारत के दौरे के दौरान बंगलूरू में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) का दौरा किया। वेदफुल ने इस यात्रा को दिलचस्प बताया और कहा कि वे भारत में तकनीकी और वैज्ञानिक क्षेत्रों में हो रहे सहयोग को देखकर प्रभावित हैं।

उन्होंने यह भी बताया कि जर्मनी में बहुत सारे छात्र जर्मन भाषा सीख रहे हैं, जो यह दर्शाता है कि दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और शैक्षिक संबंध भी तेजी से बढ़ रहे हैं।

मुक्त व्यापार समझौते में जर्मनी की सक्रिय भूमिका

जर्मनी ने मुक्त व्यापार समझौते पर जल्दी बातचीत करने का समर्थन किया है। वेडफुल ने भरोसा दिलाया कि जर्मनी और यूरोपीय संघ, भारत के साथ इस समझौते को पूरा करने के लिए हर संभव सहयोग करेगा।

भारत के लिए यह समझौता महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे व्यापारिक अवसर बढ़ेंगे, निवेश आकर्षित होंगे और दोनों देशों के बीच आर्थिक रिश्ते और मजबूत होंगे।

भारत हिंद-प्रशांत क्षेत्र में महत्वपूर्ण साझेदार

जर्मन विदेश मंत्री ने भारत की भूमिका को हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बेहद महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि भारत राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक रूप से एक मजबूत साझेदार है।

भारत, दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र और सबसे अधिक आबादी वाला देश है। इसकी आवाज न केवल क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक स्तर पर भी सुनी जाती है। इसीलिए वे बंगलूरू और नई दिल्ली की यात्रा कर रहे हैं ताकि दोनों देशों के बीच सहयोग को बढ़ावा दिया जा सके।

लोकतंत्रों का स्वाभाविक गठबंधन

जर्मन विदेश मंत्री ने कहा कि भारत और जर्मनी जैसे लोकतंत्रों के बीच स्वाभाविक गठबंधन है। दोनों देश अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को एक नियम-आधारित तरीके से चलाने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि विशाल भू-राजनीतिक चुनौतियों का सामना करने के लिए दोनों देशों को मिलकर काम करना होगा ताकि एक सुरक्षित और स्थिर विश्व व्यवस्था कायम की जा सके।

सुरक्षा, नवाचार और कुशल कार्यबल: सहयोग के स्तंभ

बैठक में दोनों पक्षों ने सुरक्षा सहयोग, नवाचार, प्रौद्योगिकी और कुशल कार्यबल भर्ती को द्विपक्षीय संबंधों का प्रमुख स्तंभ माना।

जर्मन विदेश मंत्री ने कहा कि ये क्षेत्र दोनों देशों के बीच सहयोग को मजबूत करेंगे और नई संभावनाओं के द्वार खोलेंगे।

आगे बढ़ती भारत-जर्मनी साझेदारी

भारत और जर्मनी के बीच साझेदारी का यह नया अध्याय दोनों देशों के लिए नई संभावनाओं से भरा है। वैज्ञानिक, आर्थिक, तकनीकी और सांस्कृतिक क्षेत्रों में सहयोग से दोनों देशों को लाभ होगा।

मुक्त व्यापार समझौते के अंतिम चरण में पहुंचने से व्यापार और निवेश के नए रास्ते खुलेंगे। साथ ही दोनों लोकतंत्रों के रूप में, वे वैश्विक स्थिरता और नियम-आधारित व्यवस्था को बनाए रखने में एकजुट रहेंगे।

भारत और जर्मनी की यह रणनीतिक साझेदारी आने वाले समय में और गहरी होगी, जिससे दोनों देशों के नागरिकों का जीवन बेहतर होगा और वैश्विक मंच पर उनका प्रभाव भी बढ़ेगा।

Also Read This:- राहुल गांधी की प्रधानमंत्री मोदी से अपील: बाढ़ प्रभावित राज्यों के लिए राहत पैकेज की जरूरत

Share This Article
Leave a Comment