Jhunjhunu जिले में इस वक्त CM गहलोत से ज्यादा पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट का प्रभाव ज्यादा असर दिख रहा है
Jhunjhunu। शनिवार को राजस्थान विधानसभा चुनाव का मतदान छिटपुट घटनाओं को छोडक़र शांतिपूर्ण संपन्न हुआ। शेखावाटी यानी Jhunjhunu, चूरू सीकर का अहम योगदान रहा है सरकार बनाने में।
शेखावाटी में मिली जिस दल को बढ़त उसी दल की बनी है राज्य में सरकार। यही ट्रेंड पिछले 25 साल से चला आ रहा है। राजस्थान और शेखावाटी में मुख्य स्थान रखने वाले Jhunjhunu जिले में इस वक्त मुख्यमंत्री गहलोत से ज्यादा पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट का प्रभाव ज्यादा असरकारक दिखाई दे रहा है।

Jhunjhunu District जिले में की सातों सीटों पर मुकाबला कड़ा रहा वहीं भारतीय जनता पार्टी के बागी ही बीजेपी के लिए मुसीबत बनते हुए दिखाई दिए। राजस्थान का शेखावाटी कांग्रेस का गढ़ रहा है वहीं पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया के नेतृत्व में निकाली गई सुराज यात्रा के समय भारी हर्षोल्लास से भाजपा के साथ भी रहा है।
राज्य की सुराज यात्रा के बाद ही प्रदेश में भाजपा की सरकार बनी। भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व से पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के अनबन के चलते इस बार और राजे को शेखावाटी क्षेत्र से दूर रखते हुए कम ही समय दिया जाना भाजपा के लिए खतरे की ओर इशारा कर रही है। शेखावाटी के तीनों जिलों में वसुंधरा राजे का क्रेज अभी तक बरकरार है।
वसुंधरा राजे को शेखावाटी में कम समय स्टार प्रचारक रखने का खामियाजा BJP को भुगतना पड़ सकता है
वसुंधरा राजे को शेखावाटी में कम समय स्टार प्रचारक रखने का खामियाजा भारतीय जनता पार्टी को चुनाव परिणाम आने पर कम सीटों के रूप में देखने को मिल सकता है। पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे समर्थक Jhunjhunu विधानसभा में निर्दलीय के रूप में ताल ठोक रहे राजेंद्र भाम्बू एवं पिलानी विधानसभा क्षेत्र से पूर्व कैबिनेट मंत्री सुंदरलाल के पुत्र कैलाश मेघवाल द्वारा भाजपा प्रत्याशी के विरुद्ध चुनावी समर में डटे रहना भाजपा प्रत्याशियों के लिए मुसीबत बने हुए हैं।
भाम्बू एवं मेघवाल को वसुंधरा राजे का करीबी माना जाता है। राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता राजेंद्र राठौड़ को भी कम तव्वजों दिए जाने से शेखावाटी के मतदाताओं पर प्रतिकूल असर पड़ा है।

शेखावाटी में विशेष स्थान रखने वाले जाट बाहुल्य Jhunjhunu जिले में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की बजाय पूर्व प्रदेश अध्यक्ष कांग्रेस सचिन पायलट का चेहरा ज्यादा कारगर साबित हो रहा है। गहलोत सरकार पर बने संकट के समय सचिन पायलट समर्थक ओला मजबूत स्तंभ के साथ पायलट के साथ खड़े रहे।
Jhunjhunu विधायक बृजेंद्र ओला इस वक्त झुंझुनू जिले में कांग्रेस की मुख्य धारा बने हुए हैं। झुंझुनू जिले में सीएम गहलोत से ज्यादा पायलट समर्थकों का बोलबाला है। झुंझुनू जिले की सात विधानसभा सीटों में कांग्रेस प्रत्याशियों की टिकट वितरण की तुलना की जाए तो सचिन पायलट समर्थक बृजेंद्र ओला गहलोत गुट पर हावी है।
राजनीतिक पण्डितों के अनुसार खेतड़ी से मनीषा गुर्जर को कांग्रेस टिकट दिलाना हो या पिलानी विधानसभा क्षेत्र से पितराम काला को चुनावी मैदान में उतारना साथ ही जिले की सबसे चर्चित सीट उदयपुरवाटी से गत प्रत्याशी भगवाना राम सैनी को दोबारा टिकट दिलाने में पायलट समर्थक बृजेन्द्र ओला की अहम भूमिका हैं।
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