निम्स विश्वविद्यालय में धूमधाम से मनाया गया शिक्षक दिवस-आंचलिक ख़बरें-हर्ष राज

News Desk
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दिल्ली रोड स्थित निम्स विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग में धूमधाम से मनाया गया शिक्षक दिवस। इस कार्यक्रम की शुरुआत केक काट कर किया गया फिर शिक्षकों ने दिया अनोखा स्पीच। लगभग इस कार्यक्रम में मौजूद छात्र – छात्रों की संख्या पचास में थी। पत्रकारिता विभाग के शिक्षक सोनू व विनोद सोनी इत्यादि भी मौजूद रहें। इस मौके पर विद्यार्थियों ने अध्यापकों की भूमिका अदा की और कक्षाओं का संचालन किया।

शिक्षकों ने शिक्षक दिवस के लिए दिया बेहतरीन स्पीच

डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्मदिन (5 सितंबर) 1962 से भारत में शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है। 5 अक्टूबर को विश्व  टीचर्स डे के रूप में प्रतिवर्ष मनाया जाता है, जिसे 1994 से अंतर्राष्ट्रीय शिक्षक दिवस के रूप में भी जाना जाता है। भारत में पारंपरिक रूप से गुरु पूर्णिमा को गुरुओं और शिक्षकों के सम्मान के लिए मनाया जाता है। यह पूरे देश में छात्रों द्वारा बहुत उत्साह के साथ मनाया जाता है। बच्चे अपने शिक्षकों के लिए अपने प्यार और सम्मान को दिखाने के लिए प्रस्तुतियों, उपहारों और भाषणों की तैयारी करते हैं। साथ ही अपने शिक्षकों के लिए भाषण भी तैयार करते हैं। बच्चों के साथ-साथ उनके माता-पिता भी इस तैयारी में उनकी मदद करते हैं।

डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्म दिवस के अवसर पर उनकी स्मृति में सम्पूर्ण भारत में 5 सितंबर को शिक्षक दिवस मनाया जाता है। वह एक महान शिक्षक होने के साथ-साथ स्वतंत्र भारत के पहले उपराष्ट्रपति और दूसरे राष्ट्रपति थे। गुरु का हर एक के जीवन में महत्वपूर्ण स्थान होता है। सर्वपल्ली राधाकृष्णन एक महान दार्शनिक और शिक्षक थे और शिक्षा में उनका काफी लगाव था।
सन् 1954 में शिक्षा और राजनीति में अपने योगदान के लिए उन्हें भारत सम्मान से नवाजा गया। डॉ. राधाकृष्णन एक महान दार्शनिक, शिक्षाविद और लेखक थे। जिन्होंने राजनीति में ऊंचे पद पर असीन होने के बाद भी अपने आपको शिक्षक ही माना। इसलिए उनके जन्मदिन 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है।

पत्रकारिता विभाग के शिक्षक विनोद सोनी व सोनू ने देश के पहले उप-राष्ट्रपति और द्वितीय राष्ट्रपति रहे डॉ. राधाकृश्णन को भारतीय संस्कृति के संवाहक, प्रख्यात शिक्षाविद्, दार्शनिक बताया। कार्यक्रम को सफल बनाने में अमन,स्वस्तिक,वर्तिका,दामिनी,वंशज,हर्ष राज सहित विश्विद्यालय के समस्त बालक व बलिका शामिल थे।

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