कोरोना चुस्त …आम जनता सुस्त-आंचलिक ख़बरें-मनोज द्विवेदी

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कोरोना चुस्त …आम जनता सुस्त….!!!
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# ग्राम स्तर पर परिस्थितियों को नियंत्रित करना बडी चुनौती.

# सरपंचों को 6 माह के लिये करें बहाल

# पहले दिन घरों में बन्द रही जनता
( त्वरित टिप्पणी — मनोज द्विवेदी ,अनूपपुर , म प्र)

 

अनूपपुर / 22 मार्च रविवार को जनता कर्फ्यू के तत्काल एक दिन बाद 24 मार्च मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जब समाचार चैनलों के माध्यम से एक सप्ताह में दूसरी बार देश की जनता को संबोधित किया तो यह विश्व में गहराते कोरोना संकट की तरफ बड़ा संकेत था। मोदी ने 25 मार्च, बुधवार ,गुडी पडवा ,चैट्री चंड, हिन्दू नवसंवत्सर, नवरात्रि के प्रथम दिवस से 22 दिन का राष्ट्र व्यापी लाक डाऊन घोषित करते हुए दो टूक शब्दों में कहा कि लाक डाउन को कर्फ्यू ही समझा जाए। उन्होंने यह भी चेताया कि जनता ने यदि ये 21 दिन सावधानी नहीं बरती, सचेत नहीं हुए तो बडी तबाही होगी। देश 21 साल के लिये पीछे जा सकता है। उन्होंने वैश्विक महामारी के प्रकोप से देश को बचाने के लिये इतना बड़ा निर्णय लिया । यह ना तो सरल निर्णय है , ना ही इसे अमल में लाना आसान होगा। उनकी घोषणा के महज कुछ मिनट के भीतर ही बडे – छोटे शहरों की बद हवास जनता बडी खरीददारी के लिये माल, स्टोर्स की तरफ दॊड पड़ी । कमोबेश यही परिदृश्य हर छोटे बडे शहरों में देखा जा रहा है।

संदिग्ध संवाहक बड़ा खतरा
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कोरोना वायरस भारत के अधिकांश राज्यों में दूसरे तथा कुछ राज्यों में तीसरे स्टेज पर पहुंचने की आशंका है। सरकार प्रत्येक मीडिया माध्यम से जनता को यह समझा रही है कि कोविड– 19 वायरस हवा से नहीं , बल्कि संक्रमित व्यक्ति की छींक, खांसने से हो सकता है। ऐसे में यह जरुरी है कि हम संक्रमित व्यक्ति से बचें। उसके संक्रमित किये गये प्रत्येक माध्यम से अपना बचाव करें। हर दिन संदिग्ध मामलों की बाढ सी आ रही है।
1 जनवरी 2020 के बाद विदेशों से आने वाले या अन्य राज्यों ,शहरों से वापस घर जाने लोगों से जिस सतर्कता ,कर्तव्यनिष्ठा, जागरुकता की अपेक्षा थी…वह पूरी नहीं हुई । यह एक ऐसा बिन्दु है जिसने भारत को बडे खतरे में डाल चुका है। प्रशासन की अपील के बाद भी लोग अपने घर वापस आने की सूचना नहीं दे रहे। ऐसे लोगों ने स्वयं को अनिवार्य आईसोलेशन मे भी नहीं रखा। ऐसे लोग धडल्ले से स्वयं को सुरक्षित मानकर अपने घरों में परिजनों के साथ रह रहे है। लोगों से मिलजुल रहे हैं। पार्टियां कर रहे हैं। काम धन्धे मे लगे हैं। फिल्म कलाकार, गायक,पत्रकारों ,व्यापारियों से लेकर छात्र – छात्राएं, मजदूर, कामगार जाने – अनजाने इस बीमारी के संवाहक बन कर देश को बडे खतरे में डाल चुके हैं।
प्रशासन की कडी चेतावनी के बाद भी लोग आज तक प्रशासन से मदद नहीं मांग रहे। इन्हे पहचान कर चिन्हित करने, इन्हे क्वारंटाईन करने में जितना अधिक समय लग रहा है ,संक्रमण उतना ही तेजी से फैल रहा है।

नहीं हो रहा सोशल आईसोलेशन
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश से सोशल आइसोलेशन की अपील करते हुए उन्हे लोगों से, भीड़ से दूर अपने अपने घरों में 21 दिन तक बन्द रहने को कहा है। ट्रेन, बस, हवाईजहाज ,बाजार, कार्यालय, धार्मिक स्थान, स्कूल कालेज सब बन्द कर दिये गये हैं। इसके बावजूद कुछ ऐसे लोग हैं जो बेवजह सडकों पर ,बाजारों मे आ – जा रहे हैं। सब्जी, दूध, किराने के लिये भीड लगा रहे हैं। इसके चलते कोरोना का खतरा गांव स्तर पर जा पहुंचा है।
राज्यों में जिला प्रशासन , पुलिस , डाक्टरों के सामने पुष्ट , संदिग्ध या बाहर से आए लोगों का परीक्षण, इलाज करने के साथ इसका फैलाव रोकना बडी चुनॊती है। दूसरी ओर घरों में बन्द आम जनता को 21 दिन तक भोजन, पानी, दवाओं के साथ अन्य जीवनोपयोगी सुविधाएँ देना बडी जिम्मेदारी है। ग्रामीण क्षेत्रों में सोशल आइसोलेशन के कार्यों की जिम्मेदारी वहाँ के सरपंच, सचिव, रोजगार सहायक, पटवारी, ए एन एम, आशा कार्यकर्ताओं तथा जागरुक जनसेवकों को सौंपना होगा। यही टीम लोगों को 21 दिन तक घरों में सुरक्षित रोक कर रखेगी, यही बाहरी लोगों की सूचना देगी, यही जरुरी वस्तुएँ घर घर तक पहुंचाएगी। गांव के लोग गांव में, कस्बों के लोग कस्बों में, जो जहाँ हैं वही आईसोलेट रहें, सुरक्षित रहें। म प्र में पंचायतें भंग हैं, सरपंचों, जनपद सदस्यों को 6 माह के लिये बहाल किया जाना चाहिए ।

सूचनाओं पर त्वरित हो अमल
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सरकार तथा प्रशासन तक विभिन्न माध्यमों से हजारों सूचनाएँ हर घंटे पहुंच रही हैं। इन सूचनाओं में सही, गलत, जरुरी , बहुत जरुरी सूचनाओं का परीक्षण, उस पर त्वरित कार्यवाही होनी चाहिए । यद्यपि जिला मुख्यालय में तथा अनुविभाग स्तर पर कलेक्टर द्वारा टीमें बनाई गयी हैं । मिल रही सूचनाओं पर कार्यवाही त्वरित किया जाना आवश्यक है।

मध्यमवर्ग, मजदूरों, कामगारों, भिखारियों के लिये बने योजना
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1 दिन के जनता कर्फ्यू के बाद 21 दिन का लाक डाउन निम्न मध्यमवर्ग, मध्यम वर्ग, मजदूर, कामगार , भिखारियों, बुजुर्गों के लिये कमरतोड हो सकती है। रोज कमाने – रोज खाने वालों के लिये 21 दिन तक राशन, ईंधन, दवाओं की व्यवस्था सरकार को करना चाहिए । जनधन योजना के खातों में प्रतिमाह 2000रुपये डालें जाएं तो यह गरीबों की बडी मदद होगी।

सरपंच, जनपद सदस्यों को करें बहाल
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भारत विकास परिषद के अध्यक्ष के रुप में मैने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चॊहान ,प्रदेश अध्यक्ष वी डी शर्मा से मांग की है कि म प्र में आगामी 6 माह के लिये सरपंच, जनपद सदस्यों को बहाल करें। ताकि इनका उपयोग गाँव में व्यवस्था बनाए रखने मे किया जा सके।

किसानों ,सब्जी उत्पादकों, डेयरी का रखें ध्यान
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ओला, बारिश, पाला से फसलें पहले ही खराब हो चुकी हैं। खेती , सब्जी, डेयरी, बेकरी कुछ ऐसे क्षेत्र हैं जिन्हे लंबे समय तक बन्द नही रखा जा सकता। इन्हे पर्याप्त दूरी बनाए रख कर, सावधानी बरत कर , स्वच्छता के सभी मापदंड के साथ कार्य की अनुमति देना होगा। डेयरी यदि चलेगी नहीं, सब्जियां/ ब्रेड बाजार नहीं आएगी तो इन कार्यों से जुडे लोग तथा उपभोक्ता बडे संकट में होंगे।

जनता ने बनाया मन
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इन सबके बावजूद लाक डाउन के पहले दिन से ही अधिकांश लोगों ने प्रधानमंत्री की अपील की गंभीरता को समझ लिया है। शत् प्रतिशत बुजुर्ग, जागरुक लोगों ने स्वयं को घरों मे बन्द कर लिया है। कुछ इक्के दुक्के मामलों मे पुलिस प्रशासन अपना कार्य बखूबी कर रहे हैं। यह देश के लिये राहत की खबर है।

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