संत गोंसालो गार्सिया महाविद्यालय में हिंदी सप्ताह का उत्साहपूर्ण आयोजन, विद्यार्थियों ने दिखाया कला और साहित्य में कौशल

Aanchalik Khabre
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महाविद्यालय

वसई: संत गोंसालो गार्सिया महाविद्यालय के हिंदी विभाग द्वारा आयोजित हिंदी सप्ताह का भव्य और उत्साहपूर्ण आयोजन संपन्न हुआ। इस अवसर पर विद्यार्थियों के लिए निबंध लेखन, स्वरचित कविता, शेरो-शायरी, गीत गायन, शुद्धलेखन, सुंदर हस्तलेखन, भारतीय वेशभूषा प्रतियोगिता तथा नृत्य जैसी गतिविधियाँ आयोजित की गईं। इसके अलावा, पर्यावरण संरक्षण और “मोबाइल का युवा वर्ग पर प्रभाव” जैसे विषयों पर चित्रकला प्रतियोगिताएँ भी आयोजित की गईं। इस आयोजन में लगभग 300 से अधिक विद्यार्थियों ने सक्रिय भागीदारी दिखाई और अपने कौशल का प्रदर्शन किया।

मुख्य कार्यक्रम और सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ:
15 सितंबर को हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित मुख्य कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. सोमनाथ विभुते ने की। उप-प्राचार्या प्रा. सरिथा कुरियन, हिंदी साहित्य मंडल की अध्यक्ष मनिषा यादव, कार्याध्यक्ष कार्तिकी तामोरे और रोहित विश्वकर्मा भी विशेष रूप से उपस्थित थे। कार्यक्रम की शुरुआत “मिले सूर मेरा तुम्हारा” गीत से हुई, जिसमें छात्रा शाम्भवी मिश्रा ने अपनी मधुर आवाज से उपस्थित दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके बाद जास्मीन शेख, ऋषिकेश शेवाळे, श्रावणी सुळे और कार्तिकी तामोरे ने कविता और विचार प्रस्तुत कर विद्यार्थियों में प्रेरणा का संचार किया।

हिंदी विभाग और साहित्यिक गतिविधियाँ:
हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. रामदास तोंडे ने कार्यक्रम का प्रास्ताविक किया और विभाग द्वारा विद्यार्थियों को साहित्यिक गतिविधियों में प्रोत्साहित करने के महत्व पर प्रकाश डाला। महाविद्यालय में आयोजित प्रतियोगिताओं और गतिविधियों से विद्यार्थियों में साहित्य, कला और सांस्कृतिक रुचि बढ़ती है। हिंदी भित्तिपत्रिका “बीज” का विमोचन प्रा. संध्या मेनन के हाथों किया गया, जिसने कार्यक्रम को और भी प्रतिष्ठित बनाया।

प्राचार्य का संदेश और प्रेरणा:
प्राचार्य डॉ. सोमनाथ विभुते ने अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि हिंदी भाषा राष्ट्र को जोड़ने का कार्य करती है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपील की कि वे केवल अंक और गुणपत्रक तक सीमित न रहें, बल्कि कथा, कविता, ग़ज़ल, पर्यावरण और प्रकृति जैसे विषयों में गहरी रुचि लें। साथ ही उन्होंने सोशल मीडिया के अत्यधिक उपयोग से बचने और जीवन को दिशा देने वाली पुस्तकों को पढ़ने पर जोर दिया। उन्होंने हिंदी विभाग की सराहना करते हुए कहा कि डॉ. तोंडे के नेतृत्व में विभाग लगातार विद्यार्थियों की प्रतिभा को प्रोत्साहित करता है।

समापन और आभार:
कार्यक्रम का संचालन डॉ. रामदास तोंडे ने किया, जबकि आभार प्रदर्शन प्रा. रेखा झा ने किया। ग्रंथपाल डॉ. चैतन्य वीर, महाविद्यालय के प्राध्यापकगण और बड़ी संख्या में विद्यार्थी इस अवसर पर उपस्थित रहे। हिंदी साहित्य मंडल के पदाधिकारियों और सदस्यों ने कार्यक्रम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

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