छात्रावास और स्कूलों के मध्यान भोजन का खाद्यान हजम कर गया सेल्समैन

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सतेंद्र बर्मन

ढीमरखेड़ा-रामपुर सेल्समैन मंदा शर्मा का कारनामा
चार माह से नहीं दे रहा छात्रावास और स्कूलों को खाद्यान सामग्री
उमरियापान । स्कूल और छात्रावास में पढ़ने वाले बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ उच्च गुणवत्ता वाला भोजन सरकार के द्वारा उपलब्ध करवाया जाता है जिसमें गेहूं और चावल की उपलब्ध शासन द्वारा शासकीय उचित मूल्य की दुकान से की गई है और इसका कोटा अलग से शासन द्वारा संबंधित दुकान में दिया जाता है जिसका वितरण संबंधित स्कूलों और उनके अंतर्गत आने वाले छात्रावासों मे किया जाता है लेकिन एक अचरच वाली बात ढीमरखेड़ा तहसील अंतर्गत आने वाले ग्राम ढीमरखेड़ा और रामपुर से आ रही है। उक्त दोनों ग्रामों की दुकानों में सेल्समैन मंदा शर्मा की नियुक्ति की गई है। उक्त सेल्समैन के द्वारा नियम-कायदों को ताक पर रखकर ढीमरखेड़ा और रामपुर के स्कूलों और छात्रावास में पिछले 4 माह से राशन का वितरण नहीं किया जा रहा है। वहीं जब इस संबंध में स्कूलों और छात्रावासों में खाना बनाने वाले समूहों द्वारा खाद्यान की मांगकी जाती है तो सेल्समैन के द्वारा यह कह दिया जाता है कि ऊपर से ही नहीं आ रहा है तो मैं कहां से दूंगा। लिहाजा समूहों द्वारा इस संबंध में पतासाजी की गई तब संबंधित अधिकारियों द्वारा बताया गया कि निरंतर रूप से जितना खाद्यान जाता था उतना ही जा रहा है। वहीं सेल्समैन के द्वारा हर माह कोई न कोई बहाना बनाकर स्कूलों और छात्रावास में खाना बनाने वालों को राशन नहीं दिया जा रहा है। सेल्समैन की इस तरह की कार्यप्रणाली से अंदाजा लगाया जा सकता है जब ढीमरखेड़ा तहसील मुख्यालय में ही इस तरह के हालात बने हुये है तो ग्रामीण क्षेत्रों में क्या स्थिति होगी?

किसी भी दिन बंद हो सकती है भोजन व्यवस्था
पिछले 4 माह से खाद्यान सामग्री नहीं मिलने के कारण स्कूल और छात्रावास में भोजन बनाने वालों का माथा ठनक गया है और स्थिति यहां तक पहुंच गई है कि उनके द्वारा किसी भी दिन उक्त व्यवस्था को बंद किया जा सकता है। बताया गया कि इस संबंध में सभी अधिकारियों को मौखिक और लिखित शिकायत दी जा चुकी है लेकिन अधिकारियों द्वारा भी जानबूझकर हमारी शिकायत की अनदेखी की जा रही है। हम लोग घर से अनाज लाकर भोजन बना रहे है। जिस तरह की स्थितियां निर्मित हो रही है इससे अब और आगे चलाना संभव नहीं हो रहा है।

मुख्यमंत्री ने सभा से किया था निलंबित
सेल्समैन मंदा शर्मा के द्वारा पूर्व से ही व्यापक पैमाने पर अनियमित्ता की जाती रही है। इसी तरह की कार्यप्रणाली के कारण वर्ष 2018 में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उन्हें भरी जनसभा से ही निलंबन के आदेश दिये थे। स्मरण रहे कि वर्ष 2018 में विधानसभा चुनाव के दौरान बड़वारा विधानसभा अंतर्गत उनकी सभा हुई थी तब ग्रामीणों ने भरे मन से मुख्यमंत्री को शिकायत सौंपी थी जिसमें तत्काल संज्ञान लेते हुये मुख्यमंत्री ने सेल्समैन मंदा शर्मा को मंच से निलंबित कर दिया था बाद में इस संबंध में शाम को ही कलेक्टर ने आदेश जारी कर दिये थे। बाद में विभागीय अधिकारियों की कृपा बरसी और उक्त महोदय बहाल हो गये और अब जमकर चांदी काट रहे है।

चल रही इस्तीफे की पेशकश
सूत्रों ने बताया कि सेल्समैन मंदा शर्मा के द्वारा अपने पद से इस्तीफा दिया जा रहा है और इस्तीफे की पेशकश भी उनके द्वारा अपने आलाधिकारी सहित स्थानीय अधिकारियों को कर दी गई थी लेकिन उनके कार्यकाल के दौरान व्यापक पैमाने पर अनियमित्ता हुई है जिस कारण से अधिकारियों ने दो टूक में कह दिया है कि पहले हिसाब-किताब क्लियर करो तभी इस्तीफा स्वीकार होगा। इस बात से संबंधित सैल्समैन काफी परेशान है। चूंकि इस्तीफा एक रणनीति के तहत दिया जा रहा था कि वह ऐसा करके बच जायेगा लेकिन इस्तीफा स्वीकार होने के पूर्व ही रायता फैल गया और जो अनियमित्ताएं की गई थी वो सामने आने लगी है। इस संबंध में समूहों द्वारा की गई शिकायतें भी लंबित है जिन पर जांच करने का साहस अधिकारी नहीं जुटा पा रहे है।

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